रंजन लेखी
गरिब के पेट मे भूख के ज्वाला,
खाना के खोजी हर दिन के हाला ।
सपना सह्जै छै भूख से झौंसल,
जीवन के डगर काँटेकाँट से भरल ।।
अमिर के मन मे भूख के खेल,
लालच पैसा के ऐश्वर्य के लेल ।
अघावे कहियो नै खोजैत फिरे और,
विपुलता मे भि खाली खाली ठौर ।।
नाम के भूख श्रेय पावै के चाह,
सारा संसार चिनौक एकरे परवाह ।
चकाचौंध जीवन चर्चा के लिप्सा,
मगर भीड मे असगरे बस रिक्तता ।।
राजसत्ता के भूख देखावे बड सपना,
सदैब शासन करी यहा मन मे तृष्णा ।
जनसेवा के नाम मे स्वार्थ के भोज,
सत्ता पावला पर देश जनता पर बोझ ।।
रुप सौन्दर्य के भूख दोसर कथा,
सदा सुन्दर रहै के अगाध व्यथा ।
जवानी मे मस्के सुन्दरता मे महके,
जरा जीर्ण रोग कहिया तक छुपाइवे ।।
माया वासना के भूख पताल तक चाह,
मन के आ तन के भूख के अलग राह ।
पवित्र माया के भूख हृदय के सम्बल,
वासना के भूख अस्थायी आ दुर्वल ।।
ज्ञान के भूख मुक्ति के यात्रा,
सम्यक शिक्षा त तोडे दासता ।
सत्य के खोजी समझ के चाह,
दूर असगरे पटिवेध के नाह ।।
भूख कहै छै सैब जीवन के कथा,
भिने भिने यात्रा एक साझा व्यथा ।
संसार के कुनाकाप्चा सब के दुःख,
भूख के छाया मे पेन्डोरा सन्दुख ।।
सप्तरी, हालः साज, बाहिया, ब्राजिल
२५ मे २०२४
प्रकाशित:
७९१ दिन अगाडि
|
२२ असार २०८१
६ दिन अगाडि
|
१५ भदौ २०८३
७ दिन अगाडि
|
१३ भदौ २०८३
८ दिन अगाडि
|
१३ भदौ २०८३
१३ दिन अगाडि
|
७ भदौ २०८३
२२ दिन अगाडि
|
२९ साउन २०८३
३४ दिन अगाडि
|
१८ साउन २०८३
३५ दिन अगाडि
|
१६ साउन २०८३
१४२५ दिन अगाडि
|
२५ असोज २०७९
१४६० दिन अगाडि
|
२१ भदौ २०७९
१४७० दिन अगाडि
|
१२ भदौ २०७९
१४२५ दिन अगाडि
|
२६ असोज २०७९
१३७४ दिन अगाडि
|
१५ मंसिर २०७९
१४३० दिन अगाडि
|
२० असोज २०७९
१३६३ दिन अगाडि
|
२७ मंसिर २०७९