जित ट्रासन
रैती बने नेंगल मनैया
एकफेरा मोर गाउँ छिरे ।
ओ, कम्टिमे
एक बरस कमैया बन्के
बुक्रामे बैठ्ना हिम्मत करे ।
मै ओकर किसन्वा बन्ना
खुद तयार बटुँ ।
.....
रैती बने नेंगल मनैया
एकफेरा संसदमे चिल्लाइक छोरे
ओ, कम्टिमे
मोर घारिक गोबर काह्रे
मै ओकर मलिक्वा बन्ना
खुद तयार बटुँ ।
.....
रैती बने नेंगल मनैया
एकफेरा किसानन्के खेट्वम पैंठे
ओ, कम्टिमे
बरस डिन हर जोटके
सौकिक् कारन डेना बट्ठा बुझे
मै उहि विगहा डेना
खुद तयार बटुँ ।
धनगढी, कैलाली
प्रकाशित:
४४८ दिन अगाडि
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१ असार २०८२
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