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एक बूंद लोर, एक मन्द मुस्कान

एक बूंद लोर, एक मन्द मुस्कान

खलील जिब्रान

एक ढेरी उन्मत खुशी के लेल,
आपन दिल के दुःख से सौदा नै करबै।
आ नै चाहबै ,
हमर हरेक अंग मे बहैत उदासी,
आँइख से चुवैत लोर के बुंद,
हंसी के फोहारा मे बदैल जाये ।
हम चाहवै कि हमर जीवन,
एक बुंद लोर,
आ एक मन्द मुस्कान मे समटल रहे।

एक बुंद लोर,
हमर दिल के हर धडकन के शुद्ध करे,
जीवन के गुप्त–रहस्य के बोध करैत रहे।
एक मन्द मुस्कान,
जे हमरा हमर वंश लग ले आबे,
आ भगवान–स्तूती के प्रतीक बैन जाये ।
एक बूंद लोर,
जे हमरा टूटल दिलसब से मिलाबे ।
एक मन्द मुस्कान,
जे हमर अस्तित्व के 
खुशी के निशानी बैन जाये ।

थाकल आ निराश भ्याके जियै के सट्टा,
हम प्रेम स्नेह के प्रयत्न मे मरैले चाहबै ।
अन्तरात्मा के गहिराई तक फगत
प्रेम आ सौन्दर्य के भूख प्यास हम चाहबै ।
कियाके त हम
सैब से दुःखी आदमी के भि
आत्मसन्तुष्ट हैत देख्ने चियै
आ तृष्णा आ लालसा से वशिभूत
आदमी के भि आह सुन्ने चियै
जे मधुर संगीत से भि बेसी मधुर छै ।

समेट लै छै आपन पौंखडी
एक फूल गोधुली बेला मे
आ सुईत जाईछै
आलिङ्गन कैर सब लालसा के ।
आ फेनो सुबह के आगमन मे
आपन रसिला ओठ आगु कैर दैछै
भानु के चुम्बन के लेल ।
एक फूल के जीवन चाहत आ तृप्ति चियै । 
एक बूंद आंसू आ एक मन्द मुस्कान ।

समुन्दर के पानी भाफ बैन के 
उइड चलै छै आकाश मे
करिया मेघा बैन के 
छितयावैत रहै छै, गोलियावैत रहै छै 
आ बौआवैत रहै छै अवारा जेना
कि पहाड आ कि उपत्याका सबै के उपर ।
मन्सुनी हावा के साथ 
खूशी के आँसु उमैर परै छै 
झहरै छै बुँद बुँद लोर 
धरती के चादर मे 
बहै छै धारा बैन के नदी नाला मे 
फेनो समून्दर के ओर 
आपन घर आपन निधान । 
बादल के जीवन विछोह आ मिलान 
एक बुँद लोर आ एक मन्द मुस्कान ।

अहिना त है छै एक उन्मुक्त हंस–प्राण
चराचर जगत मे रमै–भमै वाला
आपन महान माँ के कोख से 
विछुड के 
हर दुख कष्ट के पहाडी तुफान के झेलैत 
बादल के तरह उइड चलै छै
आनन्द के मैदान मे मस्ती करैत
फेन मिलै छै मृत्यु के सर्दी हावा से
आ लोटैले परै छै ओतैए
जते से एलछै —
प्रेम आ सौन्दर्य के भवसागर देवता ।

 

भावानुवाद: रंजन लेखी

सप्तरी, फत्तेपुर, सप्तकोशी

हालः ब्राजिल

३ डिसेम्बर २०२४

 

A Tear and A Smile

                       Khalil Jibran

I would not exchange 
the sorrows of my heart
For the joys of the multitude.
And I would not have the tears 
that sadness makes
To flow from my every part
 turn into laughter.
I would that my life remain 
a tear and a smile.

A tear
to purify my heart 
and give me understanding
Of life's secrets and hidden things.
A smile 
to draw me nigh to 
the sons of my kind and
To be a symbol of 
my glorification of the gods.
A tear to unite me 
with those of broken heart;
A smile 
to be a sign of my joy in existence.

I would rather that 
I died in yearning and longing  
than that I live weary and despairing.
I want the hunger for love and beauty to be in the
Depths of my spirit,
for I have seen those who are
Satisfied the most wretched of people.
I have heard the sigh of those in yearning and longing, 
and it is sweeter
than the sweetest melody.

With evening's coming
 the flower folds her petals
And sleeps, embracing her longing.
At morning's approach 
she opens her lips to meet
The sun's kiss.
The life of a flower is
 longing and fulfilment.
A tear and a smile.

The waters of the sea
 become vapor and rise and come
Together and are a cloud.
And the cloud floats 
above the hills and valleys
Until it meets the gentle breeze,
 then falls weeping
To the fields 
and joins with brooks and rivers 
to return to the sea, its home.
The life of clouds is 
a parting and a meeting.
A tear and a smile.

And so does the spirit become separated from
The greater spirit to move in the world of matter
And pass as a cloud over the mountain of sorrow
And the plains of joy to meet the breeze of death
And return whence it came.

To the ocean of Love and Beauty----to God.
 

प्रकाशित:

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