पुराक थारू
गाउँभर चम्पन बा
आझ अचम्हँक खबर
छिङ्गटाहन भउजि उठल बाटि चुनाउ ।
हाँठम् सैट्ना, कपारिम झउह्वा लेख,
कहटि- "आब मै फेरम गाउँक डगर ।"
गाउँक चौराह म बैस्क डेठि भासन,
हाँस हाँस्ख जिट्ल बटि सक्कुनके मन ।
काल्हुक डिनसम बनबन्याट म आघ सरँठ,
आझ विकासक योजना खुलस्ट कहटि।
कह भिरलि नस्से-
"पानी लनम सकुन्हँक घर-घर,
लर्कन्हँक पहरना बिढ्यालय सँप्रैम
आपन पाले म ।
बुर्हा-पाखन सम्मान व सहयोग करना,
ठरयँन हँ सीप सिखैना रोजगार डेना ।
रान परोस मन्के हँस्ठ-
"भउजि टे बर-कर्रा बटि!"
पाछ ओँरसे किउ कठ-
"आब ट फुरसे लरहि !"
मने भउजिक आँख सपनाले भरल,
गाउँक मुँह फेरना अठोट बाटि करल ।
चुनाउक डिन आइल, बाजल मन्ड्रा व नारा,
सकुन्हँक मनम बा उट्साहके पारा ।
छिङ्गटाहन भउजिक साहस व चाहा,
गाउँलेन सम्झटि आघ हुँकाहार सरना आहा ।
जिट ह्वाए या हार, बट्कोहि खास,
आपन हक अढिकारके लाग उठल बरा आस ।
छिङ्गटाहन भउजिक चुनाउक आवाज,
गाउँ फेरजिना हुइल सुरुवाट ।
२०८२/११/९
दंगीशरण गाउँपालिका, सुकदेवा दाङ
प्रकाशित:
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