जाड़ोमा किसान 

जाड़ोमा किसान 

१२३ दिन अगाडि

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१९ पुष २०८२

उ डिन फेन आइटा आब

उ डिन फेन आइटा आब

१३० दिन अगाडि

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१२ पुष २०८२

रूमा चौधरी हमार जिन्गिक लावा अध्याय सुरू हुइटा आब  हम्रे सफलतक पहाड उचियइना डिन आइटा आब  हम्रे आजसम हमार डाइ बाबन्के नाउँमे बहर्ली पौंह्रली आब हमार डाइ बाबनहे हम्रे सहेर्ना डिन आइटा आब ।   डाइ बाबा बहुट दुख कस्ट कैके बढैलाँ पढैलाँ  ओइनके लगाइल रिन टिरना डिन आइटा आब  हमार सफलतक लग कट्रा ढेर सपना डेख्ले हुइही  डाइ बाबनके उ सपना पुरा कैना डिन आइटा आब ।   डाइ बाबा हमार ओजरार भविस्यक लग अपन खुशी ट्यागल हुइही  उ त्याग ओ समर्पन समझके आगे बढना डिन आइटा आब  डाइ बाबा हमार खुशीक लग हरेक चिजमे बहुट महत्व डेहेअस ओइनके इच्छा चाहनाहे महत्व डेके खुशी बनैना डिन आइटा आब ।   आजुक मेहनत, लगनशिलता काल्हिक भविष्य कटी  डाइ बाबा लर्कनके कमाही खैना दिन आइटा आब सब दुख कस्ट हेराके सबके मुहेम मुस्की विल्गना  उ डिन फे आइटा आब, उ डिन फे आइटा आब ।   राप्ती गाउँपालिका–८, पिपरी, दाङदेउखर हालः कक्षा १२, गोरखा सेकेन्डरी स्कुल, लमही

सत्तक भन्सम सिकार क बास 

सत्तक भन्सम सिकार क बास 

१३१ दिन अगाडि

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११ पुष २०८२

बौराइ अस बह भिरल कौर्यारम किउ नि फन्कि किउ ओम का पानी आपन हुइ परट नि कहि जब बह्र्या घट लागि जब बाझ भिरहिँ पखै ओ जालम सौँरि सक्कु ज आपन आपन खोजहिँ हिस्सा किउ कहि लड्य ह आपन बाबक बिर्टा किउ कहि पानी ह आपन पुर्खक बिर्टा किउ कहि मछ्छि ह आपन बिर्टा पटा बा महासय, खेट्वम किउ नि सरुइया हो हाँठ–ग्वारा किउ नि करुइया हो ढुर्याढुनम काम  किउ नि फँकुइया हो झौह्वक ग्वाबर जब धान फरि सक्कु ज खोजहि हिस्सा  सक्कु ज खोजहि अधिकार पटा बा महासय, किउ नि पलुइया हो छेग्रा किउ नि बह्रुइया हो खोँर्वा  किउ नि कटुइया हो घाँस, झाला किउ नि पनुइया हो छेग्रा किउ नि फर्चुइया हो काठि किउ नि रिझुइया हो सिकार  जब मग्मगाइ भिरि भिट्टर भन्सा सक्कु ज ख्वाज लगहि आपन बठा इहाँ हर क्रान्ति ओ परिवर्तनम एक्ज रठ पस्ना ओ रकट बहुइया जब सत्तक भन्सम सिकार क बास आइट और रठ ड्वान डोसुइया ओ बठा पउइया ।    बर्दिया, आबः काठमाडौं  

जारके घोङही

जारके घोङही

१३६ दिन अगाडि

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६ पुष २०८२

-नन्दलाल चौधरी  जारमे घोङहीके सबाद बेजोर, जब तिसीमें मिले मारके झोर जारमे घोङही मारलने ज्या पाइन देहके थर थर कप्या माइरके लाबे त माजलने ज्या माजैले गांइर काटलने ज्या सैब कामके जब लागे ओर जारमे घोङहीके सबाद बेजोर । घोङही मझहोलबा सबाद निमन जैहनं तोरी ख्याल पेरबाके तिमन माघके बुआरी आ रौहके शीरा घोङही उठाबे यै सबसे लरैके बिरा बासमती भातमे चले यकरो जोर जार्हमें घोङहीके सबाद बेजोर । चीज केहेन इ घोसारलने ज्या माजैत, झांकैत,परसैत,खरबर्या येहेन जे चुइभतो झांपलने ज्या  फेकतौखना कानमें झरक सम्या तन जैहनं कारी मन तैहनं गोर जार्हमें घोङ्हीके सबाद बेजोर । लसुनके पत्ता,हरियरका धनियां करूके तेल टरकाबे जब कनियां चनी आ गरम मसोला द्या मनसे आलस भुइजके मिलाबे जतनसे गम गम गमके चारू ओर बेसिये सब चुभहे  कोइने थोर । थारू संस्कृतिके केहेन परिकार पहचानके यकर आपने संस्कार सभ्यतामें सोहो आपन छै शान विरासतमें मिलल अलगे सम्मान जरूर येतै एक दिन उ भोर  जारमे घोङहीके सबाद बेजोर, जब तिसीमें मिले मारके झोर । धन्यवाद बसघराके ८९ औं श्रृंखला (२०८२ पुस ५) मे प्रस्तुत