स्कुल जैना रहर लागठ

स्कुल जैना रहर लागठ

२५८ दिन अगाडि

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४ पुष २०८२

बघौरा

बघौरा

२७८ दिन अगाडि

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१४ मंसिर २०८२

                                                                                                                                                                                       स्केचः एआइ   म्वार जिउ भिट्रक म्वटु, कर्जा, फोक्सा सक्कु चुम्मर बा हाँठ, ग्वारा सक्कु चुम्मर बा व सैडिठ्ठ जिउ चुम्मर बा टभुन म्वार जरम चुम्मर नि लागठ् काजेकि म्वार जर्मक इन्जिन बिग्रल बा उहमार म्वार जरम चुम्मर नि लागठ । म्वार जर्मक इन्जिन सडिमान बरघरान अङ्ना सम्झठ जोन अङ्नम नाँचट बर्का नाच जोन अङ्नम नाँचट छोक्रा नाच बरघरान अङ्ना जहाँ ह्वाए न्याय निसाफ जहाँ ह्वाए हिट्वक उड्डार म्वार जर्मक इन्जिन सडिमान बरघरान बह्रि सम्झठ जहाँ टिकँट अस्टिम्कि म्वार आङ्गमसे बहलक उ जह्रि म्वार आङ्गमसे बहलक उ खौरौह्वा जहाँमारट मछ्छि बघौरा, चिठौर व लम्कोल्हिक मछ्वार मनै किउ ख्याल सिकारिक ला हँक्वा जब्ब लिप्टिन बर्खा टब्ब सुरु हुइन गाउँ मनैन्हक मुन चिर्ना किउ काट भिर बनकस व पुँन्जा किउ जुन्हुँ सज्ना गैटि खेट्वा पनाए किउ डस्यम बर्किमार गाए किउ माघम ढुम्रु गाए जब्से मै बघौरासे जब्से म्वार लग्गक सङ्घारि चिठौरा व लम्कोल्हिसे सज्ना, मैना डुस कैगिल अट्वारि, अस्टिम्कि डुस कैगिल व कैगिल बर्किमार व ढुम्रु डुस टब्से म्वार जरम चुम्मर नि लागठ म्वार आङ्गमसे बहना जह्रि व खौरौह्वक मछ्छरगिढ्ढि थारुनसे भ्याँटक सिन्हि बाटन पुँन्जा कट्ना जन्नि, मुन चिर्ना जन्निनके गाइल मैना सुन्ना सिन्हि बा आस्काल खाभर किउ नि लगाइट हँक्वा किउ नि ख्यालट खर व बन्कस कट्ना थारु फे नि डेख्पर्ठ काजेकि आसकाल सरकार महिँ (बघौरा), चिठौरा व लम्कोल्हि गाउँ ह उक्ठाक निकुञ्ज बनाइल बा यिहाँसे छारा कैक गिलक मनै बन्खेट्वा गाउँ म रहट सम आपन मनै लग्ग रहल असक लाग आस्काल उ गाउँ ह फे सरकार उक्ठा स्याकल सरकारके कना बाटिस, ‘बन्वाँ व जनावर बचाइक ला गाउँ उक्ठिलक हो’ बघ्वा आक गाउँ उक्ठाइ लागल यि भर सरकार खै कैह्या ड्याखि ?   बर्दिया  

आँसके खिस्सा 

आँसके खिस्सा 

२८२ दिन अगाडि

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१० मंसिर २०८२

                                                                                                                                                                                       स्केचः एआइ थारू भासा                  ‘बाबा एकठो चुटकिला सुनाउ ना  सड्डे सड्डे एक देसके राजकुमार राजा रानिक् खिस्सा कट्रा सुन्ना ।’ असिक छुटकि छाइ चुटकिला सुनाइक आग्रह कैलक ढेर हो सेकल  मै एकडिन कलुँ– ‘छाइ, यि चुटकिला सुन्ना समय नै हो बेन आज फेन  मै टुहिन एकठो खिस्सा सुनैम आँसके खिस्सा ।’ ‘का उ आँसके खिस्सा सुन्के हाँसि आई ?’ छाइ जिज्ञासा ढैलि । ‘नाहि, छाइ नाहि यि खिस्सामे हाँसि नै हो ।’ ‘टब टे नै परि बाबा मै आँस टे आँस गिराइक चाहटु मने, खुसिक् आँसके खिस्सा सुनक् चाहटु ।’ मोर छाइ ओइसिन विचार कसिक निकारल मै अप्नेहे छक्क पर्लु । मने, पटा नै हो यि देसहे आपन ठनुइयन  पराइ देसमे जाके  बाकसमा बन्ड हुइटि स्वडेस घुमेबेरिक  डुःखके आँसके खिस्सा कब सम डोह्र्‍यइहि  कब सम ? हालः कीर्तिपुर, काठमाडौँ   आँसुको कथा (नेपाली)                                  कृष्णराज सर्वहारी ‘बाबा एउटा चुटकिला सुनाउनु न  सधैं संधैं एकादेशका राजकुमार राजा रानीका कथा कति सुन्नु ।’ यसरी सानी छोरीले चुटकिला सुनाउन  आग्रह गरेको धेरै भइसक्यो  मैले एकदिन भनें– ‘छोरी यो चुटकिला सुन्ने समय होइन बरु आज पनि  म तिमीलाई एउटा कथा सुनाउछु आँसुको कथा ।’ ‘के त्यो आँसुको कथा सुनेर हाँसो छचल्किन्छ ?’ छोरीले जिज्ञासा पोखी । ‘होइन छोरी, होइन यो कथामा हाँसो छैन ।’ ‘त्यसो भए पर्दैन बाबा म आँसु त आँसु नै झार्न चाहन्छु तर, खुशीको आँसुको कथा  सुन्न चाहन्छु ।’ मेरी छोरीले त्यस्तो विचार कसरी प्रकट गरी म आफै छक्क परें । तर, थाहा छैन यो देशलाई आफ्नो ठान्नेहरुले  बिरानो देशमा गएर  बाकसमा कैद हुँदै  स्वदेश फिर्दाको  दुःखका आँसुको कथाहरु  कहिलेसम्म दोह्र्‍याउने हुन् कहिलेसम्म ?    ......    

कलजुगके बजारमे लाज सरम बिक्टि बा

कलजुगके बजारमे लाज सरम बिक्टि बा

२९० दिन अगाडि

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२ मंसिर २०८२

–सत्यनारायण दहित १. कलजुगके बजारमे लाज सरम बिक्टि बा     बिना मोल गरिब–गुर्वन्के करम बिक्टि बा     कब बुझ्हिँ मनै सब्के भगवान् एकठो बटैं,    यहाँ टे भगवान्के नाउँमे ढरम बिक्टि बा ।   २.पनभर्निन्हे लडियक घट्वम्से बलाइ परल अखोरियन्हे झोपरि अट्वम्से बलाइ परल हेरि टे, सबजे अपन पहिचानके लग लरटैं हलि करि हरोइहेन्हे खेटवम्से बलाइ परल ।          ३. कोइ चोखा हुइक लग छिट्टि बा सोनपानि          कोइ नाउँ, ढरम कमाइ लग बन्टि बा डानि          बरा गजबके लागल यि कलजुगके डुनियाँ,         कोइ रहरसे कोइ करसे बेच्टि बा जवानि ।   ४. जाइटो मने मोर चिठ्ठि सब फारके जाउ  जट्रा फें रिस हुइ सारक सारा झारके जाउ  टोहाँर बिना केकर लग जिना यि जिन्गि, बिन्टि बा कस्टोक् यि ‘सत्य’हे मारके जाउ ।          ५. टोहाँर लजरसे परेसान बा जिउ टिकापुर आके       अइसा मुस्कि मार डेलो हैरान बा जिउ टिकापुर आके        कइसिक सम्हारम मै यि मनहे, अपन घरे जाके        उ मोहनि रुपसे बेठेकान बा जिउ टिकापुर आके ।   ६. असौंक साल टुटल छँपरा लावा खरले छाँब छोट्कि मँजुरि ढटौरि कैके फेंन मोटा चाउर खाब छोट्कि कबु हार ना मन्हाें टोहाँर सहारा मै मोर सहारा टुँ, हमार मैगर मैयँक् गिट ओहे बुक्रम गाब छोट्कि ।                  –कैलारी गाउँपालिका–१ मनाउ, कैलाली, हालः धनगढी दहितके थारु भासामे झिर्खि मुक्तक संग्रह प्रकासिट बटिन् । साभारः लावा डग्गर त्रैमासिक, २०७३, बरस ७, अंक ३, पुर्नांक २७

इ मन टुँहिन बाहेक और किहुन गन्बे नि करट

इ मन टुँहिन बाहेक और किहुन गन्बे नि करट

२९५ दिन अगाडि

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२७ कात्तिक २०८२

डियर अविरल  टुँ कठो बिस्रा डेउ, म्वार मन जुन, मन्बे मन्बे नि करट,  जाट्टिसे, टुँहिनसे डुस हुइ ई मन, जन्बे जन्बे नि करट  ज्यानसे ढ्यार मैयाँ टुँहार लागट, टुँ मानो या मानो, टुँहार नाउँ बिना निलेला, ढक्ढिउरा चल्बे चल्बे नि करट  सन्झ्या बिन्हँया, डिन डुपहर, राट बिराट सुरटा टुँहार,  इ मन टुँहिन बाहेक और किहुन, गन्बे गन्बे नि करट  सुखम हसुइया, डु:खम रुउइया म्वार मनै टुँह् ट हुइटो,  स्वाचल पुगट ट ई जिउ, डु:ख खन्बे खन्बे नि करट  साट जलम सम्म मै टुँहार हुइटु "डियर" कहुइया टुँ,  आस्काल डान्चे बाटम रिसैठो, बाट बन्बे बन्बे नि करट ।   बर्दिया नेपाल,  हालः दोहा, कतार गजलकार इ रचना एआइसे रेकर्ड कइके गिट बनैले बटाँ । https://www.facebook.com/share/v/1DUVBS9w6B/

मोर बुबाक यङोछा 

मोर बुबाक यङोछा 

३०१ दिन अगाडि

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२१ कात्तिक २०८२

सुनिल कुमार महतो हमरा थारु  हमार भाषा, हमार रहनसहन  ठ्याक्के मोर बुबाक यङोछा नहिया । मोर बुबाक यङोछवा  बुबाक लजवा मत्रे हैने झाँपसिय, हमार थारुक पहिरन,  चिनारी हँसे थारुक पहिचान फेनी  बोकले बणिय । धेवरी बिनेके, बेवाँ बिनेके, डेली बिनेके, मछुवारी करेके  सबकर साक्षी हलीय मोर बुबाक यङोछवा । यमोसा मनावेके, दशैँयामा देवता खेलाएके, सोहराइ मनावेके, खिचरा मनावेके फगुवावामा सामत लेसे हँसे ठेकरा खेलाए बुबाक यङोछवा फेनी सङही सङही जैय  मोर बुबाक साङे । याजुकालु बहुतजाना छोडदेलई यङोछा पेहेरेके जसने पवनीयाह गगससई हमारा मनोले पर, हँ ठिक वसने मोर बुबाक यङोछवा फेनी गगससीय मोर बुबाक पेहरले पर । गोरहर यङोछा याजुकालु, मैलाके करिया देखेसिय हमार थारुक चिनारी फेनी रसे रसे भुलाईल जाइ बणई, बुबाक यङोछवासे गोरहरी रङवा भुलाईल जाई नहिया । माडी–४, सिधुवा, चितवन कवि महतो सिन्धुलीमे स्थायी शिक्षक बणई