टीकापुरमा रानी कुलोको नाम कसरी रहन गयो ?

टीकापुरमा रानी कुलोको नाम कसरी रहन गयो ?

३२३ दिन अगाडि

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४ असार २०८२

महेश चौधरीक् भासिक योगदान उपर छलफल

महेश चौधरीक् भासिक योगदान उपर छलफल

३२६ दिन अगाडि

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३२ जेठ २०८२

काठमाडौं, कीर्तिपुरस्थित ठुम्रार साहित्यिक बखेरीके १०५औं भागमे जेठ ३१ गते साहित्यकार महेश चौधरीके भासिक योगदानके उपर विस्तृत छलफल कैगैल बा । थारु भासके पहिला पत्रिका गोचाली (२०२८) के संस्थापक प्रधानसम्पादक महेश चौधरीके थारु, नेपाली ओ अंग्रेजीमे दर्जनसे ढेर पोस्टा प्रकाशित बटिन् । २०६२/२०६३ पाछे हुइल पहिचानके आन्दोलनमे थारु मधेसी नै हुइट कना मेरमेरिक लेखके संगसंगे ‘नेपालको तराई तथा यसका भूमिपुत्रहरु (२०६४)’ पोस्टा लिख्के प्रतिवाद कर्ले रहिट । दाङ, बैबाङका स्थायी वासिन्दा उहाँ २०८२ जेठ २४ गते राप्ती स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, घोराहीमा उपचारके क्रममे बिटल रहिट । थारु भाषासेवी महेश चौधरीक् टिसर स्मृति दिवसके अवसरमे उहाँक्  बारेम ठुम्रार साहित्यिक बखेरीक संयोजक डा कृष्णराज सर्वहारी बिस्तृत चर्चा कर्ले रहिट । थारु लोकसाहित्य माँगर, बर्किमार, गुर्वावक् जल्मौटि, झुमरा नाचके गिट लगायत पोस्टा पहिल फेरा छाप्के महेश बरा गुन लगैलक उहाँ बटैलाँ । थारु व्याकरनसे लेके छारा नाटकके लेखन किल नैहेक नाटक मञ्चनमे समेत उहाँक् योगदान रहल सर्वहारी जनैलाँ ।  कार्यक्रममे डा. रामबहादुर चौधरी महेश चौधरीक् सँग व्यक्तिगत अनुभव साझा कैटि कहलाँ ‘उहाँक् लो ल्याण्ड अफ नेपाल पोस्टाके अंग्रेजी भासामे उल्ठाके लग सहकार्य करेबेर बिहानि ६ बजे मोर डेरामे पुगेबेर उहाँको कामप्रतिके खन्गर झुकाव डेख्के मै छक्क परल बटुँ । विडम्वना मोर सच्याइल सामग्री नै छप्के पुराने सामग्री छपलमे बहुट दुख लागल । उहाँक् सब पोस्टा फेनसे छप्ना चाहि ।’ ओस्टक, शत्रुघन चौधरी महेश चौधरीक् अनुसन्धानके कामके प्रसंसा कैटि कहलाँ, ‘महेशके सबहस अनुसन्धानमे थारु समुदायहे जोरके बहुट गहन अध्ययन बा । उहाँक् सिख्खा अन्य अनुसन्धानकर्तालोग फेन कैना चाहि ।’ कार्यक्रममे नन्दुराज चौधरी, गणेश वर्तमान, दिलबहादुर चौधरी, सिताराम चौधरी, विवश चौधरी, कलम बडुवाल लगायत स्रस्टालोग रचना वाचन कर्ले रहिट ।

थारु भसा साहित्य केन्द्रके अध्यक्षमे फेनसे भुलाइ चौधरी

थारु भसा साहित्य केन्द्रके अध्यक्षमे फेनसे भुलाइ चौधरी

३३९ दिन अगाडि

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१९ जेठ २०८२

थारु भसा साहित्य केन्द्र नेपाल जेठ १७ गते अपन डुस्रा अधिवेशन नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानके पारिजात हलमे निम्जैले बा । अधिवेसनसे थारु भसा साहित्य केन्द्रके अध्यक्षमे फेनसे भुलाइ चौधरी चयन हुइल बटाँ । ओस्टक उपाध्यक्ष बुद्धसेन चौधरी, महासचिव सियाराम चौधरी, सचिव सहदेव चौधरी, कोषाध्यक्ष राकेश सिंह लगायत सब पुरान पदाधिकारीे हुइल बटाँ । ओस्टक सदस्यमे राम स्वागत चौधरी, कल्पना चौधरी, इन्दु चौधरी, आशिष चौधरी, सुमन चौधरी उदयनारायण चौधरी रहल महासचिव चौधरी जनैलाँ । केन्द्रके अध्यक्ष भुलाइ चौधरीके घरगोस्याइमे हुइल उद्घाटन कार्यक्रममे बर्का पहुना युवा तथा खेलकुद मन्त्री तेजुलाल चौधरी डा कृष्णराज सर्वहारीलगायत ३ जनहन सम्मान कर्ल । सम्मानित हुइनामे समाजसेवी शत्रुघनप्रसाद चौधरी ओ साहित्यकार सन्तोषी चौधरी बटाँ । कार्यक्रममे मन्त्री चौधरी अइना बरससे थारु भसा साहित्य केन्द्रमार्फत् २५ हजारके साहित्यिक पुरस्कार स्थापना कर्ना घोसना फे कर्ल । उहाँ थारुन् खानपानमे सुधार करे पर्ना, जागिरसे फेन लावा लावा व्यावसायमे हाँठ डारे पर्ना बटैलाँ ।  थारु लेखक संघ नेपालके केन्द्रीय अध्यक्ष डा कृष्णराज सर्वहारी केन्द्रहे अपन स्थापना दिवसके अवसरमे साहित्यिक पुरस्कार स्थापनाके लग अर्जि करलमे मन्त्री चौधरी सहकार्य करना वाचा कर्ले रहिट ।  उद्घाटन सत्रमे विनय वैद्य, डा रामबहादुर चौधरी, विजय चौधरी, सुशीला बेटी, विमल चौधरी, शान्ति चौधरी, आशिष चौधरी, थाकस केन्द्रीय अध्यक्ष प्रेमीलाल चौधरी, थारु आयोगके माननीय भोलाराम चौधरीलगायत बोलुइयन शुभकामना डेले रहिट । कार्यक्रममे रचना वाचन फेन हुइल रहे । कार्यक्रममे शान्ति चौधरीके ६९औं पोस्टा सलहेस फुलवारी डा अम्वेडकर पार्क ? के विमोचन बर्का पहुना मन्त्री चौधरी ओ अन्य पहुनालोग कर्ले रहिट ।  केन्द्रके उपाध्यक्ष बुद्धसेन चौधरी स्वागत ओ कार्यक्रमके सहजीकरन महासचिव सियाराम चौधरी कर्ले रहिट । थारु भसा साहित्य केन्द्र प्रत्येक महिनक् पहिला सनिच्चरके थारु साहित्यिक रचना वाचन बसघराके ८३औं भाग निम्जा सेक्ले बा । ओस्टक वाचित रचनाके ६ अंक बसघरा पत्रिका प्रकासन फे कर्ले बा ।   

थारु लेखक संघके पचवाँ बार्षिक साधारण सभा सम्पन्न

थारु लेखक संघके पचवाँ बार्षिक साधारण सभा सम्पन्न

३५८ दिन अगाडि

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३० वैशाख २०८२

थारु लेखक संघ, नेपालके पचवाँ बार्षिक साधारण सभा सोम्मारके रोज धनगढीमे एक कार्यक्रम बिच वैशाख २९ गते सोम्मरके निम्लज बावै । थारु लेखक नेपालके अध्यक्ष जीत बहादुर चौधरी ‘ट्रासन’के घरगोसियाइमे हुइल कार्यक्रमके बर्का पहुना वरिष्ठ साहित्यकार यज्ञराज यात्री रहल रहिट । कार्यक्रमहे सम्बोधन कैटी बर्का पहुना यात्री आपन भाषा, कला रीति संस्कृति चालचलन, रहन सहन बचैना आवश्यक रहल बटाइल रहिट । उहाँ कहलै, ‘आपन पन सबकुछ होवई, आपन‐आपन हो । ओहेमारे हम्रे आपन भाषा, कला रीति संस्कृति चालचलन, रहन सहन सक्कु चीज बचैना आवश्यक रहल बावै ।’ ओकर लाग उहाँ थारु लेखक संघ, थारु साहित्यकार, पत्रकार कलाकारहुक्रनके मुख्य जिम्मेवारी रहल फेन बटाइल रहिट । उहे बिच उहाँहे साहित्यिक क्षेत्रमे योगदान पुगाइल कहटी सम्मान करल रहे । उहाँहे थारु लेखक संघके पूर्व अध्यक्ष सीताराम चौधरी दोसल्ला प्रमाणपत्रसे सम्मान करल रहिट । कार्यक्रममे बोलुइया सक्कुजाने फेन थारु भाषा, कला, साहित्यहे बचैना जरुरी रहल बटाइल रहिट । उहाँहुक्रे थारुहुक्रनके पहिचान, इतिहास बचाइक लाग सक्कु जाने लागे पर्ना औंल्याइल रहिट । कार्यक्रमके खास पहुना तथा थारु लेखक संघके संस्थापक सदस्य माधव चौधरी, दिलबहादुर चौधरी, थारु लेखक संघके कानुनी सल्लाहकार जोहारी लाल चौधरी, प्रतिभा महिला पुरस्कारके संस्थापक चन्द्रसिंह चौधरी, कर्मशिल बचत तथा ऋण सहकारी संस्थाके अध्यक्ष रामप्रसाद चौधरी, थारु गाउँ भादा होमस्टेके अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण चौधरी, फोनिज सुदूरपश्चिम प्रदेश इन्चार्ज लखन चौधरी, फोनिज सुदूरपश्चिमके महासचिव भानुप्रताप राना, थारु लेखक संघके पूर्व उपाध्यक्ष सानु चौधरी, गायिक मनमति बखरिया, थारु चलचित्रके निर्देशक चन्द्र चौधरी चाँद लगायत शुभकामना मनतब्य राखल रहिट । उहे बिच थारु लेखक संघ नेपालके सचिव अनिल कुश्मी आव २०८१/०८२ के बार्षिक प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करल रहिट । उहाँ बार्षिक क्रियाकलाप अन्र्तगत कैलारी गाउँपालिकाके स्थानीय विषयक पुस्तक ‘हमार कैलारी’ कक्षा २ के लेखन, प्रकाशन ओ वितरण करल, धनगढीके गुरही चौकमे असराजैना गुहरी टिहवार कार्यक्रमके समन्वय सहकार्य ओ आयोजना, २०८१ साल फागुन १५ से १७ गतेसम बर्दियाके राजपुर‐२ जोतपुरमे ९औं थारु साहित्य राष्टिय सम्मेलन आयोजनाके साथे उहे कार्यक्रममे बर्दियाके सुशील चौधरीहे नगद ५० हजार शाशीके थारु साहित्य सम्मानसे पुरस्कृत ओ बेलारी नगरपालिका ७ कञ्चनपुरके सुनिता चौधरी सानुहे नगद २५ हजार राशीके प्रतिभा सशक्तिकरण पुरस्कारसे सम्मान करल जनाइल रहिट । ओस्टके उहाँ आगामी कार्य योजना अन्र्तगत थारु लेखक संघके केन्द्रीय कार्यालय धनगढीमे स्थापना कैना, मासिक साहित्यिक कार्यक्रम कैना, आजीवन सदस्य संख्या वृद्धि कैना, अइना १०औं थारु साहित्य राष्टिय सम्मेल २०८२ माघ १५ से १७ गते पर्सा जिल्लाके सुगौली पटेर्वा गाउँपालिकाके बेलवा गाउँमे कैना, विद्यार्थी साहित्य महोत्सव आयोजना कैना, थारु मौलिक बाजागाजा बजैना तालिम ओ सामाजिक कार्य ओर रक्तदान कैना कार्ययोजना रहल सुनाइल रहिट । ओस्टके थारु लेखक संघसे अब्बेसम पाँच जनहनहे थारु साहित्य सम्मानसे पुरस्कृत करल बटैलै । उहाँ कैलालीके लक्ष्मी राना, बर्दियाके शेखर दहित ओ सुशील चौधरी, दाङ देउखरके दोषहरण चौधरी ओ सुनसरीके रामसागर चौधरीहे उ पुरस्कारसे पुरस्कृत करल हो । ओस्टके प्रतिभा महिला सशक्तिकरण पुरस्कारसे दाङदेउरखके मन्जिता चौधरी, बाराके शान्ति चौधरी ओ कञ्चनपुरके सुनिता चौधरी सानु सहित ३ जनहनहे पुरस्कृत करल जनाइल बावै । ओस्टके कार्यक्रममे कोषाध्यक्ष दुर्जन कुमार चौधरी आव २०८१/०८२ के आयव्यय विवरण प्रस्तुत करल रहिट । उहाँ आठ लाख ८७ हजार १०८ रुप्या बराबरके आयव्यय प्रस्तुत करल रहिट । कार्यक्रममे थारु लेखक संघके जिल्ला कार्यसमिति सदस्य राजुराज चौधरी स्वागत करले रहिट कलेसे सञ्चालन सहसचिव दिनेश संगम करले रहिट । कैलारी अनलाइनसे

सुर्खेतमे थारु ठन्वक् उद्घाटन

सुर्खेतमे थारु ठन्वक् उद्घाटन

३७६ दिन अगाडि

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१२ वैशाख २०८२

सुर्खेतके वीरेन्द्रनगर नगरपालिका–१२ पदमपुरम थारु भुइह्यार ठन्वाके नवनिर्मित भवनके घुरघुट खोलाइ कार्यक्रम वैशाख ११ गते हुइल बा ।  उ अवसरमे ठन्वाके घुरघुट खोलाइ कार्यक्रमके बर्का पहुना वीरेन्द्रनगर नगरपालिकाके वडा नं १० के अध्यक्ष एवम् कार्यवाहक नगरप्रमुख डिल बहादुर रखाल कहल,₋ थारु समुदायके धार्मिक सांस्कृतिक पक्षसे जोरगिल ठन्वा निर्माण कार्यले संस्कृति जगेर्नाम एकठो इटा ठप्गिल ।  थारु पूजापाठ रीतिरिवाजके पुनर्जागरण हुइना हुइलक ओहर्से थारु समाजम एकठो लौव सन्देश जैने बा । ओसहख वडा नं १२ के वडा अध्यक्ष चुडामणि चपाईँ वडाके सहयोगम बन्लक ठन्वा निर्माणम नगरपालिका ओ वडा कैक करिव सवा पाँच लाख खर्च हुइल जनैल ।  कार्यक्रमम लखागिन थारु उत्थान मञ्च, सुर्खेतके अध्यक्ष एवम् थारु साहित्यकार मान बहादुर चौधरी ‘पन्ना’ कल₋ भुइह्यार ठन्वा थारुनके मूल संस्कृति हो । ठन्वा थारुन जोर्ना पुल हो, ठन्वा धार्मिक एकताके प्रतीक किल नाहि कि जीवनपद्धतिसे जोरगिल मैगर संस्कृति हो । यकर संरक्षण संवर्धन हुइना बहुत जरुरी बा । उहाँ ठन्वा निर्माण किल महत्वपूर्ण निहो, ठन्वाम कैजिना पूजापाठ ढुरेरी, हरेरी पूजा, मार मिन्ही नियमित कर्ना चुनौती रलक ओर्से पूजापाठके विधिह नियमित करपर्ना सुझाउ डेल ।  कार्यक्रमम थारु कल्याणकारिणी सभाके केन्द्रीय पार्षद कृष्ण बहादुर चौधरी, जिल्ला  सभापति अध्यक्ष बेचुलाल चौधरी, पदमपुरके समाजसेवी लालबहादुर चौधरी लगायतके वक्ता हुक्र ठन्वा निर्माणले सुर्खेती थारु समुदायमा एकठा असल पाठ सिखैलक धारणा व्यक्त कर्ल । ठन्वा निर्माण समितिके अध्यक्ष एवम् पदमपुर गाउँके महटावा दुर्ग बहादुर थारु ₋ पदमपुर गाउँम विगत २०७८ सालठेसे नियमित रुपम मारमिन्ही, ढुरेरी, हरेरी पूजा करैटि अइलक बात ढर्ल । करिब ३ बरस बर्दियासे गुरुवा लान्खन पूजा कैगिल कलसे हाल सुर्खेतम जो गुरुवा व्यवस्था कैगिल जनैल ।  कार्यक्रमम मेरमेरिक थारु नाच फे डेखा गिल रह । 

१५ बुँदे घोषणा–पत्र  जारी गर्दै ‘राष्ट्रिय मूर्तिकला सम्मेलन’ सम्पन्न

१५ बुँदे घोषणा–पत्र जारी गर्दै ‘राष्ट्रिय मूर्तिकला सम्मेलन’ सम्पन्न

३८१ दिन अगाडि

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७ वैशाख २०८२

नेपाल ललितकला प्रज्ञा–प्रतिष्ठानको आयोजनामा वैशाख ५ गते शुक्रवार १५ बुँदे घोषणा–पत्र पारित गर्दै ‘राष्ट्रिय मूर्तिकला सम्मेलन’ सम्पन्न भएको छ ।   घोषणा–पत्रमा उल्लेख छः  १. सरकारी निकायबाट सिर्जना  गरिने मूर्तिकलाको सम्बन्धमा विद्यमान सार्वजनिक खरिदसम्बन्धी कानुनबमोजिम बोलपत्र आह्वान गर्दा मूर्तिकारहरूले भन्दा निर्माण व्यवसायीले काम पाउने अवस्था हुने र निर्माण व्यवसायीले निर्माण गरेका मूर्ति सिर्जनाका दृष्टिले गुणस्तरीय र कलाको मर्मअनुरूप नहुने हुँदा सार्वजनिक खरिदसम्बन्धी विद्यमान कानुनमा सुधार गरी त्यस्ता मूर्ति वा कला सिर्जना गर्न बोलपत्र आह्वानसम्बन्धी छुट्टै कानुनी प्रावधानको व्यवस्था गर्न पहल गर्ने ।  २. मूर्ति सिर्जना गर्दा चाहिने आवश्यक कच्चा पदार्थको उपलब्धतालाई सहजीकरण गर्न कच्चापदार्थको आयातमा भन्सार र अन्य कर छुट हुने कानुनी व्यवस्थाका साथै स्थानीय कच्चा पदार्थको सहज उपलब्धता र स्थानीय कच्चापदार्थ सङ्कलन र ढुवानीमा कुनै कर दस्तुर नलाग्ने कानुनी व्यवस्था हुनुपर्ने ।  ३. मूर्तिकला सिर्जना गर्दा आधुनिक प्रविधिमैत्री तथा वातावरणमैत्री बनाउन आवश्यक सामग्री आयात गरी  व्यवस्थापन गर्न र मूर्तिकलाको सिर्जना गर्नसमेत सरकारी स्तरबाट उपयुक्त स्थान उपलब्ध गराउने व्यवस्थाका लागि पहल गर्ने ।  ४. आजकल छिटो पैसा कमाउने मनसायले व्यापारी प्रयोजनका लागि शास्त्रीय विधान र कलाको सिर्जनशीलता र मर्म नै मर्ने गरी जथाभावी रूपमा मूर्ति सिर्जना गर्ने कार्य भइरहेको अवस्था हुँदा मूर्ति सिर्जना गर्दा  शास्त्रीय विधान र कलाको मर्म विपरीत नहुने गरी सिर्जना गर्न आवश्यक पहल गर्ने ।  ५. मूर्तिकला निर्माण, प्रदर्शनी र त्यसको  प्रवर्धन गर्न मूर्तिकला ग्राम तुरुन्त बनाउन पहल गर्ने ।  ६. देशका लागि विदेशी मुद्रा भित्र्याउने स्रोतमध्ये महŒवपूर्ण स्रोतका रूपमा रहेको नेपाली ललितकला  निर्यात गर्दा लाग्ने भन्सार र कर छुट हुने व्यवस्थाका साथै निर्यात गर्दा हुने प्रशासनिक झन्झट निराकरण गरी सहज  हुने व्यवस्थाका लागि आवश्यक पहल गर्ने ।  ७. सरकारी स्तरबाट मूर्तिकलाको मूल्याङ्कन गर्दा  भौतिक साधनको मात्र मूल्याङ्कन नगरी कला सिर्जनाको मूल्यका आधारमा गरिने व्यवस्था हुनुपर्ने ।  ८. मूर्तिकारको स्वास्थ्य बिमा र मूर्तिकार स्वास्थ्य कोष स्थापनाका लागि आवश्यक पहल गर्ने ।  ९. मूर्तिकलाको प्रतिलिपि अधिकारको सुनिश्चितता  गर्न पहल गर्ने ।  १०. विद्यालय स्तरको पाठ्यक्रममा मूर्तिकला समावेश गर्न, मूर्तिकला विषयलाई विभिन्न विश्वविद्यालका पाठ्यक्रममा समावेश गर्न र  सबै विश्वविद्यालयमा मूर्तिकला विषयसहितको ललितकला विभाग खोल्न तथा विशेष गरी मूर्तिकला  विषय अध्ययन गर्ने विद्यार्थीहरूलाई छात्रवृत्तिको व्यवस्था गर्न आवश्यक पहल गर्ने ।  ११. समूहगत रुपमा मूर्ति बनाउँदा कार्य विभाजनका आधारमा पहिचान उल्लेख गरी मूर्तिकारको आत्मसम्मानको कदर गर्ने ।  १२. मूर्तिकलाको अध्ययन, अनुसन्धान, मूर्तिकला र कलाकारको अभिलेखीकरणका साथै प्रदर्शनी, कार्यशाला, तथा राष्ट्रिय तथा अन्तर्राष्ट्रिय स्तरमा कला र कलाकारको पहुँच अभिवृद्धि गर्न पहल गर्ने ।  १३. हाल बनेका सरकारी भवनहरूमा नेपाली कलाकृति/ मूर्तिकलासमेत राख्ने व्यवस्थाका लागि सरकारले बजेटको व्यवस्था गर्ने, अब बन्ने सरकारी भवनमा भवन निर्माणको इस्टमेट गर्दा नै बजेटको निश्चित प्रतिशत रकम ललितकलाबाट सजावट गर्नका लागि तोक्ने नीतिगत व्यवस्था गर्ने र आगामी दिनमा सर्वसाधरणले बनाउने घरको नक्सा स्वीकृत गर्दाकै अवस्थामा भवनको निश्चित स्थानमा ललितकलाले सजावट गर्नुपर्ने प्रावधान राखी नक्सा पास गर्नुपर्ने कानुनी व्यवस्थाका लागि पहल गर्ने ।  १४. ललितकलाका विभिन्न विधामध्ये  मूर्तिकला विधा अध्ययन गर्न निकै खर्चिलो हुनका साथै शारीरिक परिश्रम पनि बढी पर्ने र अन्य कारणले गर्दा ज्यादै कम विद्यार्थीले मात्र अध्ययन गर्ने हुँदा यस विधाको अध्ययनका लागि प्रोत्साहन गर्न छात्रवृत्तिलगायत अन्य सुविधाको व्यवस्था हुन आवश्यक पहल गर्ने ।  १५. नेपाली कलाकृति खरिदमा प्राथमिकता दिन पहल गर्ने ।  नाफा हाल, नक्सालमा भएको ‘राष्ट्रिय मूर्तिकला सम्मेलन’  प्रतिष्ठानका कुलपति नारदमणि हार्तम्छाली एवं प्रतिष्ठानका पूर्व उपकुलपति ठाकुरप्रसाद मैनालीले उद्घाटन गर्नुभएको थियो । कार्यक्रममा कुलपति हार्तम्छालीले यस सम्मेलनबाट उठेका कुराले अगामी बाटो तय गर्ने हुनाले कलाकारहरूले सूक्ष्म ढङ्गले राखेका विचार तथा धारणा महत्त्वपूर्ण हुने बताउनुभयो । उहाँले कलाकारकै भावनालाई समेटेर आगामी रणनीति तय गरिने बताउनुभयो ।   प्रतिष्ठानका पूर्व उपकुलपति एवं अग्रज मूर्तिकार ठाकुरप्रसाद मैनालीले प्रतिष्ठानले अन्तर्राष्ट्रिय क्षेत्र/संस्थासँग समन्वय गरी विभिन्न अन्तर्राष्ट्रिय कार्यशाला तथा कार्यक्रमहरू गरी कला र कलाकारलाई प्रवर्धन गर्नुपर्ने आवश्यकता रहेको उल्लेख गर्नुभयो ।  प्रतिष्ठानका सदस्य सचिव देवेन्द्रकुमार काफ्ले ‘थुम्केली’ले नेपालमा मूर्तिकलाको अवस्था विषयमा पावरप्वाइन्ट प्रिजेन्टेसनमार्फत विविध पक्षको चर्चा गर्नुभएको थियो । उहाँले यस क्षेत्रको संरक्षण, प्रवर्धन तथा विकासका लागि आगामी दिनमा स्थानीय/प्रदेश/सङ्घीय सरकार, प्रतिष्ठान, शैक्षिक संस्था, कलाकारले गर्नुपर्ने कार्य तथा पहल र कानुनी विषयमा विस्तृतमा व्याख्या गर्नुभएको थियो  ।  प्रतिष्ठानका मूर्तिकला विभाग प्रमुख दिनेश्वर महतोले सम्मेलनले नेपालको मूर्तिकला क्षेत्रका नीतिगत र कलाकारका समस्या तथा यस क्षेत्रको प्रवर्धनका लागि प्रतिष्ठानले गर्ने अन्य विविध कार्यका बारेमा समेत निचोड निकाल्ने बताउनुभयो । सम्मेलनमा प्राज्ञ नरेन्द्र भण्डारी, प्राज्ञ प्रदीप शाक्य, प्राज्ञ भुवन थापा, प्राज्ञ तारा ओझा, अग्रज मूर्तिकार शान्तकुमार शाक्य, कलाकार राकेश शाक्य, आरम्भ समूहका अध्यक्ष कलाकार सुदर्शन विक्रम राणा, आरम्भ समूहका सचिव इन्द्र खत्री, कलाकार पूर्णकाजी शााक्य, कलाकार विष्णु श्रेष्ठ,कलाकार माधव पौडेल, सुनिता राणा, कलाकार लक्ष्मण भुजेलसँगै मूर्तिकला क्षेत्रलाई प्रतिनिधित्व गर्ने सातै प्रदेशका कलाकार प्रतिनिधिसहित ८० भन्दा बढी कलाकारहरूको उपस्थिति रहेको थियो । 

राप्ती साहित्य परिषदबाट दुई दर्जन स्रष्टा पुरस्कृत हुँदै

राप्ती साहित्य परिषदबाट दुई दर्जन स्रष्टा पुरस्कृत हुँदै

३८३ दिन अगाडि

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५ वैशाख २०८२

राप्ती साहित्य परिषद्, दाङले प्रा डा बाबुराम आचार्यसहित २४ जना श्रष्टालाई पुरस्कृत गर्ने निर्णय गरेको छ ।  परिषद्को पुरस्कार प्रतिभा छनोट समितिका संयोजक पुरुषोत्तम खनालको संयोजकत्वमा बिहीबार बसेको समितिको बैठकले २०८१ सालको राप्ती साहित्य पुरस्कारबाट दाङका प्राध्यापक डा। आचार्यलाई प्रदान गर्ने निर्णय गरेको हो ।  यसैगरी, २०८० सालमा प्रकाशित १८ थुङ्गा नामक जीवनी विधाको कृतिका लागि दाङका पद्मप्रसाद शर्मालाई राप्ती साहित्य सिर्जना पुरस्कारबाट पुरस्कृत गर्ने बैठकले निर्णय गरेको छ । बैठकले नन्दहरि साहित्य पुरस्कारबाट दाङका सुरेशकुमार पाण्डेयलाई, डोमादेवी साहित्य पुरस्कारबाट दाङका शशीधर भण्डारीलाई, दीलसरी दल अतिरिक्त साहित्य पुरस्कारबाट रोल्पाका मोहित श्रेष्ठलाई पुरस्कृत गर्ने निर्णय गरेको छ । यसैगरी, बैठकले देवीचन्द्र साहित्य पुरस्कारबाट बाँकेका डा। हरिप्रसाद तिमिल्सेनालाई, अयामुकुन्द प्रज्ञा पुरस्कारबाट प्युठानका नारायण गौतमलाई, गोपाल चन्द्र प्रज्ञा पुरस्कारबाट दाङका हरिप्रसाद पाण्डेयलाई, हरिप्रसाद मिना पाण्डेय कला साहित्य पुरस्कारबाट दाङका केबी चौधरीलाई, खोबिलाल हुकुमादेवी छन्द पुरस्कार दाङका गिरीराज खनाललाई प्रदान गर्ने निर्णय गरेको छ । बैठकले पद्मप्रसाद रुपसा प्रज्ञा पुरस्कारबाट दाङका अभि क्षेत्री समर्पणलाई, तिलका तुलसीराम आचार्य स्मृति पुरस्कारबाट बुटबलमा प्रा। डा। कपिल लामिछानेलाई, चक्रपाणि लोकेश्वरी छन्द पुरस्कारबाट दाङका कपिलकिशोर घिमिरेलाई, नित्यानन्द प्रज्ञा पुरस्कारबाट प्युठानका सुमन सुवेदीलाई, चन्द्रमधु गीत संगीत पुरस्कारबाट दाङ देउखुरीका यादवनाथ योगीलाई, ओपेन्द्र रत्नशोभा साहित्य पुरस्कारबाट रुकुम पश्चिमका भुपेन्द्रा मल्ललाई प्रेमनारायण सावित्रा हेमकुमारी प्रज्ञा पुरस्कारबाट रोल्पाका अमर अधिकारीलाई पुरस्कृत गर्ने निर्णय गरेको छ । श्रीबहादुर दीलमाया साहित्य पुरस्कारबाट रुकुमपूर्वका कर्णबहादुर बुढा मगरलाई, टेकबहादुर सुवर्ण राजभण्डारी साहित्य पुरस्कारबाट बाँकेका महानन्द ढकाललाई, जीवनचक्र साहित्य पुरस्कारबाट सल्यानका हिरालाल केसीलाई, पं। कपिलमुनि भक्तकुमारी शिवादेवी स्मृति स्रष्टा सम्मानबाट सल्यानकी बिनु बुढाथोकीलाई, ऋषि लक्ष्मी साहित्य पुरस्कारबाट पश्चिम रुकुमका खेमराज खड्कालाई, गोमादेवी स्मृति कला पुरस्कारबाट दाङकी दीपा बुढालाई र विष्णुनुमा साहित्य पुरस्कारबाट दाङका मनिष गिरी ‘ऋतु’लाई पुरस्कृत गर्ने बैठकले निर्णय गरेको छ । यसैगरी बैठकले दाङ साहित्य तथा संस्कृति प्रतिष्ठान तुलसीपुर, कवि धर्मराज बैरागी देउखुरी, अग्रज साहित्यकार मधुसुदन गौतम दाङ र नारी श्रष्टा बसन्ता शाह हापुरलाई सम्मान गर्ने भएको छ ।  छनोट गरिएका सर्जक, साहित्यकार एवम् संस्थालाई पुरस्कार तथा सम्मान आगामी वैशाख १९ गते राप्ती साहित्य परिषद्को वार्षिकोत्सवका अवसरमा प्रदान गरिने भएको परिषद्का अध्यक्ष डा टीकाराम उदासीले बताए ।