तस्विरः एआइ
सिताराम चौधरी
बहुट बरस पहिलेक बाट हो । उ समयमे पसुुपन्छि चिरैचुरुङ्गा रुखुुवा बरिख्वा सक्कु चिज मनै हसक बोले सेक टहिँट् । ओहे समयमे एकठो बहुुट भारि बनवाँँ रहे । बनवक किनारे बहुट सुन्डर गाउँ रहे । ऊ बनवाँमे मेर मेरके चिरैचुरुङ्गा ओ गाउँमे मनै ओ पाल्टु जनावर बैठिट् । बनवाँ बहुट भारी रलक ओरसे बनवाँमे फे मेर मेरके पसुपन्छिनके बसेरा रहिन् । ओहे बनवक किनारेक एकठो गाउँमे एकठो मुर्गनियाँ अँठरा बनाके रोजडिन अन्डा पारे ।
एक डिन बनवाँ मनिक गिडरा चरहट–चरहट गाउँ पुुग जाइठ । गाउँमे यहोंर ओहोंर चरहे बेर मुर्गनियक अन्डा भेंटाइठ । गिडरा बहुट भुखाइल रहठ । उ गिडरा सोचठ् अइसिक नै बनि अन्डा ओन्डा खाइक परल । गिडरा एक्के अन्डा बचाके जम्मा अन्डा खाके चलडेहठ । आब टे गिडरा परच जाइठ अन्डा खाके । मुर्गनियाँ डेलि अन्डा पारठ, गिडरा फे रोजडिन एक अन्डा बचाके खाके चल डेहठ ।
मुर्गनियाँ सोचठ् कहाँ जाइठ् मोरिक अन्डा, के खाइठ् मोर अन्डा रोजडिन अक्के अन्डा बचल रहठ । के हो मोर अन्डा गायब परुइया ? आब यिहि बिना पटा लगैले नै हुइ । मने मने अट्रा बाट सोच्टि मुर्गनियाँ अन्डा चोर पटा लगाइक लाग अन्डा–ओन्डा पारके अँठरक् पँजरे चिमा लागके बैठजाइठ् । परचल गिडरा जुन पुग्टिकिल आ जाइठ अन्डा खाइक मारे । अँठरा पुग्टिकिल मुर्गनियाँ अइस्सा फटफटाके कोंटकोंटैटी उरके खोंटके छुटठ ओ गिडराहे गर्याइ लागठ । भुुखाइल गिडरै ओस्टेहें टे भुख्ले छटपट्टि लग्ठिस् आउर उप्परसे मुर्गनियक गारि पाके आउर रिस लग्ठिस् ।
गिडरा कहठ, ‘मोर का पटा टोर अन्डा हो कैह्के बिना सहेरिक अँठरम डेख्नु भुख लागल रहे खा डेनु ।’
यिहे गिडरा हो मोर सक्कु अन्डा खउइया कैह्के जान लेहठ् ओ आउर भकभकाके खोंटके छुटठ । ओहोंर गिडरा भुुखासल फे रहठ, आउर उप्परसे खोंटके छुट्ठिस् टे मनेमने सोंचठ् एक टे भुख लागल बा आउर टे उप्परसे सारक मुर्गनियाँ खोंटके आइटा कैह्के मुर्गनियक पर रिस लगठिस् । टब गिडरा अइसा उलरके पकरठ् । मुर्गन्यै पकरके म्वाँइठ् ओ खा डेहठ । उ डिन मुर्गन्यै खाके गिडरक पेट भर जइठिस् टब सोचठ अन्डा कहाँ जाइ । यि अन्डा आब डोसर डिन खैम कहिके एकठो अन्डा बचा डेहठ् । मुर्गन्यै खाके गिडरा अपन घोलमे जाके सुट जाइठ् ।
आगेक डिन टन्न पेट भरके मुर्गन्यक सिकार खाइल गिडरा डोसर डिन भुँख नै लागल हो कैह्के चरहे फे नै जाइठ् । ठिक्के ओहे डिन एकठो कुकरा जौन अँठरम अन्डा बैठल रहठ् ओहे अँठरा होके जाइठ् । टब अन्डासे कुकरक् भेट हुइठिस् । अन्डै डेखके कुकरा बोलठ— टोर डाइ बाबन ओ डाडु डिडिहन गिडरा खा डेहल, आब टहिं किल बचल बटे । यहाँसे भाग जाइस, नै टे टुहि फे खा डि उ गिडरा ।
अन्डा कुकरक बाट सुनके मने मने सोचठ, सारे मोर परिवारके सक्कु जनहन खाके ओरुइया उ गिडरैसे टे बिना बडला लेले नै छोरम, चाहे मोर ज्यान चलजाइ । अन्डा अक्केलि गिडरै मर्ना टिउ लगाके अँठरमसे निकर जाइठ् । ओहोर ओर डुइ डिनके वाडमे भुख लग्ठिस गिडरै ओहे बचल एकोक ठो अन्डा खाके चिट बुझैम कैह्के अँठरा ओर चलल् । यहोंर ओर अन्डा ज्यान जाइ टे जाइ कैह्के गिडरै मारे निकर जाइठ् ।
गिडरै मारे निकरल अन्डा ढनमन ढनमन करटि डगरे डगरे चलडेहठ । ठोरिक डुर पुगठ टे सुइ पुछठ अन्डैसे—कहाँ जाइटि संघारि रिसाइल हसक डरबर डरबर अक्केलि ?
‘अरे कहाँ जइबि, सारे गिडरा महिन किल छोरके मोर घर परिवारके सक्कु जनहन खा डेहल, टब उहि मारके उहिसे बडला लेहे जाइटु ।’ अन्डा जवाफ डेहल ।
टब सुई कहठ ‘टब टे मै फे जइम अप्नेक सँगे गिडरै मरे । मोर संघरियक डुस्मन टे मोरो डुस्मन ।’
अन्डा कहल ‘ठिके बा अप्ने फे चल्बि टे आउर मजा हुइ ।’
आब एकसे डुइ हो गिलै गिडरै मरुइया । अन्डा ओ सुुइ चलडेठैँ । डुनु जाने नेँगट—नेँगट ठोरिक डुर आउर बनवम पुग्ठै टे ओइनहे गोबर डेख लेहठ । ‘अरे कहाँ जाइटि संघारिनके डरबर—डरबर बरे हडबड बा का ?’ गोबर पुछठ ।
‘नै कहुँ, जाइटि गिडरै मारे । मोर घरक सक्कु जनहन खाके आपन घोलम भागल बा गिडरा सारे ।’ अन्डा जवाफ डेहल ।
‘अरे टब टे मै फे जइम अप्नेन सँग गिडरै मारे । डुइसे टिन हो जाब और मजा हुइ । सारे गिडरा महिन फे खोब सटैले बा ।’ गोबर कहल ।
‘एक टे मै आ गैनु अप्ने कहाँ जइबि खालि डुखे किल हुइ हम्रे टे मार डारब उ गिडरैहे ।’ सुइ बोलठ् ।
नै—नै मै फे जइम लैचलि ना सायड डुइए जनहन के कर्रा परि उहिहे मर्ना ।’ गोबर कहल ।
ठिके बाटे चलि डुइसे टिन हो जाब, आउर मजा हुइ ।’ अन्डा सहमटि जनैटि कहठ । अब टिनु जाने चलडेठै गिडरै मारे बनवाँ ओर ।
जाइट—जाइट, जाइट—जाइट बहुट डुर भिट्टर बनवाँ पुग्लै टे एकठो रुखवक बुटका बोलठ् ‘राम, राम संघारिनके कहाँ जाइटि ? कोइ जरुरी काम परगिल कि का ?’
‘अरे का बटाउँ संघारि, जरुरि कना हो कि का कना हो, हम्रे जाइटि गिडरैहे मारे बनवाँमे ।’ अन्डै डेखैटि यि ‘हिकार डाइ, बाबा, डाडु, डिडि सक्कु जनहन खाके भागल बा सारे गिडरा । आज पटा पाइ ओकर का हुइठिस् ।’ सुइ बोलठ ।
एक घचिक सोंचठ–सोचठ, ‘टब टे महु जइम अप्नेन् संग उ हरामि गिडरै मारे । बरा हेगासल रहे काहु सारे एक डिन टे मोर उप्पर हेग डेले रहे महि फेन रिस लागल बा ओकर पर ।’ कहटि बुटका बोलठ ।
‘ठिके बा चलि टे का चार जे हो जाब टे और मजा हो जाइ । चारु ओरसे घेरके मारब सारे गिडरा हे ।” गोबर सहमटि जनाइठ् ।
‘हाँ–हाँ चलि टे का हमारे मजा हुइ ।’ अन्डा फे सहमट हो जाइठ ।
आब ओइने अन्डा, सुुइ, गोबर ओ बुटका चलडेठै गिडरै मारे बनवाँ ओर । चल्टे फिरटे – चल्टे फिरटे बहुट डुर पुग जिठैँ । भिट्टर बनवाँमे ओइनहे पटबिछिया भेट होजाइठ् । पटबिछिया पुछठ ‘अटरा साँझ हो गैल कहाँ चाइटि चारु जाने बनवक भिट्टर डरबर–डरबर, का जरुरी काम परगिल ?’
टब अन्डा कहठ–‘का कहु संघारी, बरे डुखके बाट बा । यि बनवाँमे सारे एकठो गिडरा बैठठ् । उ गिडरा मोर घर परिवारके महिन किल बचाके सक्कु जनहन खा डेहल । उहिसे बडला लेहे निकरनु टे यि सब संघारिनके महि सहायटा करक लाग आ गिलै ।’
‘टब टे महु चलडेम गिडरै मारे ।’ पटबिछिया कहठ ।
‘ठिके बा चारसे पाँच हो जाब आउर मजा हुइ ।’ अन्डा सहमटि जनाइठ् ।
आब पाँचु संघरियन गिडरक घोल खोजे निकर डेठैं । खोजट–खोजट, खोजट–खोजट राट बिटे लागठ् भिन्सारे हो जाइठ । टब बलटल ओइने गिडरक घोल भेंटैठैं । भिट्टर जाके हेर्ठैं टे गिडरा नै रहठ । उ टे चर्हे गैल रहठ । पाँचु संघरियन यिहे मौका बा कैह्के गिडरै मरना टिउ बनैठैं ओ कहठैं जइसिक फे यि गिडराहे मारके छोरब ।
अन्डा कहठ ‘मै गिडरक टपना आगिम जाके बैठम ।’ सुइ कहठ ‘मै टे ओकर पठरिम नुकके बैठम ।’ ‘मै टे गिडरक बिच डुवारिम बैठम ।’ गोबर कहठ । टब बुटका कहठ ‘मै टे गोबरके ठिक उप्पर झुलल रहम ।’ ओ पट बिछिया कहठ मै टे गिडरक लगैना भुर्किक् टेलम जाके बैठल रहम ।
टिउ अन्सार सक्कु जाने आपन–आपन ठाउँमे जाके गिडरक असरा लागके बैठजैठैं । भिन्सारे ओजरार हुइ हुइ करे लागठ टे राटभर सिकार खेलके मिच्छाइल गिडरा सोझे आपन पठरिम सुटे जाइठ ।
जब गिडरा सुटठ् टे सुइ लागठ गिडराहे गझर गझर गोझे । गिडरा उठ्के हेरठ कुछ नै डेखठ फेन सुट जाइठ । सुट्टिकिल सुइ फेन गोझे लागठ कच्याक कच्याक । गिडरा सुटे नै सेकके सोचठ आब जाउँ आगि टापे ।
जब गिडरा आगि टापक लाग आगि खोब डटके डमक्वाके पस्कक् पन्जरे बैठल रहठ टे अन्डा अइसा डटके ब्वाङ्से फुटठ् । डम्कल आगि उछिटके जम्मे गिडरकमे चलजैठिस । गिडरा डह लेहठ । डहल खोब भोभाइ लग्ठिस टे गिडरा सहे नै सेक्के चलठ भुरकिक् टेल लगाइ । जब टेल लगालेहठ टे पुरा पटबिछियक सोंरहे रठिस आउर डटके सौंस्याइ लग्ठिस ।
टब गिडरा सोंचे लागठ, आज का हो गिल यि घरम् । आब मै टे नै बैठम् यि घरम कहटि जब गिडरा हडबड भागे लागठ आपन घरमसे टे अइसा डुवारे मनिक गोबरम रपटके उनाटे गिरठ कि ओकर उपरका बुटका छाटिम गिर जैठिस, बस गिडरा मरजाइठ् ।
लेखक शिक्षण पेशामे संग्लग्न बटाँ । उहाँक् थारु लोकबट्कुहिके संग्रह प्रकासन बटिन ।
साभारः लावा डग्गर त्रैमासिक, २०७३, बरस ७, अंक ३, पुर्नांक २७
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