कपिलमणि
नै मिलल् यहाँ मन्दिरमे भगवान नै मिलल्
मुर्ति मिलल् मने कुछ पहिचान नै मिलल्
मै कसिक स्विकार करुँ टोहार यि गल्टि
जब चोट लागल कौनो निसान नै मिलल्
लहास् बोक्के मटियाइ जैठाँ यहाँ टिरियन
अरे यि डेसमे एक्को फेन जवान नै मिलल्
टुँ महिहे सायड बिस्राके हुइ सेकठ छैलि
टोहारे याड बोक्के अइना तुफान नै मिलल्
अम्रुखहे फेन सरकार राहट छुट्याइठ्
सज्जनके लग कौनो सम्मान नै मिलल् ।
दाङ, बेलझुण्डी
साभारः लावा डग्गर त्रैमासिक, बरस ७, अंक ४, (कार्तिक–पुस) २०७३
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