गोसिन्यकसँगे कवि महतो
विन्तिराम महतो
सुन्ले टु टुह आजकाल कवि हुइल टो
चिरैनके चिरविर चिरविर आवाजमे
सिरिस्टिके कहानि खोज्ठो
फुलनसे पुछ्ठो
अट्रा सुग्घर रुप कहाँसे पैठो ?
मेरमेरिक रंगसे अपन रुप सजैठो ।
आजकाल टुह डार्सनिक फे हुइल टो काहुु
रुखुवासे पुछ्ठो
टै आघे कि मै आघे ?
के हो हमार पुर्खा
टुह बिना मै नाइ, मोर बिना टुह
मेरमेरिक सवाल करठो ।
सुन्ले टु आजकाल
अढिकारवाडी फे हुइल टो
पिंजडाके सुगुवा ओ खोभरा भिट्टर
छटपटाइल वनसुवरके
छटपटिहे अपन छटपटि समझठो
हुक्रनके हक अढिकारके लग सोगैठो
आजकाल्ह टु अढिकारवाडी फे हुइल टो ।
टुु टो ढर्मि फे हुइल टो काहुन,
हावा, पानी, अग्नि,
रुखबिर्छाके पुजा करठो
मच्छर मारेवेर
पाप ओ ढर्मके बाट करठो
आजकाल्ह टुह बरा ढार्मिक हुइल टो ।
टुहिन वैग्यानिक फे कहुु कि
बर्टिरहल डिन (सुर्य) भिट्टर जाके
सोन निकर्ना बाट करठो
यि ग्रहसे उ ग्रह सयर कर्ना
टोरै टोरंगनमे बास बैठ्ना बाट करठो
डिन राट अमृट खोज्ना प्रयास करठो
आजकाल्ह टुुह वैग्यानिक फे हुइल टो ।
टीकापुर, कैलाली
हालः नेपाल टेलिभिजन, कोहलपुर, बाँके
साभारः लावा डग्गर त्रैमासिक, बरस ७, अंक ४, (कार्तिक–पुस) २०७३
नोटः सिर्सक परिवर्तन
प्रकाशित:
१५ दिन अगाडि
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८ वैशाख २०८३
३ दिन अगाडि
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२० वैशाख २०८३
१४ दिन अगाडि
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९ वैशाख २०८३
१५ दिन अगाडि
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८ वैशाख २०८३
१८ दिन अगाडि
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६ वैशाख २०८३
१८ दिन अगाडि
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५ वैशाख २०८३
२० दिन अगाडि
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३ वैशाख २०८३
२० दिन अगाडि
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३ वैशाख २०८३
१३०३ दिन अगाडि
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२५ असोज २०७९
१३३८ दिन अगाडि
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२१ भदौ २०७९
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१२ भदौ २०७९
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