मेरमेरिक टलकिच्रन

मेरमेरिक टलकिच्रन

१४८ दिन अगाडि

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२४ मंसिर २०८२

जब समुन्डरके बिच्चे बिच हमार लाउ बिल्टल

जब समुन्डरके बिच्चे बिच हमार लाउ बिल्टल

१५७ दिन अगाडि

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१५ मंसिर २०८२

ओंरि टारेबेर २०१८ नोभेम्बरके अन्टिम अँठवार । राटके ११ बजे हमार उरान हुइलक ओरसे मैं एयरपोर्ट ८ बजे ओर पुग रख्ले रहुँ । करिब आढा घन्टा भिट्टर सक्कु संघरियन जुट गइलि । टब हम्रे भिट्टर पैँठलि । हमार पुग्ना फिलिपिन्सके ‘मनिला’ टक रहे । करिब डुइ अँठवारके बैठाइ रहल ओरसे लुगरा–लट्टा भरल एकठो सुटकेस ओ खटरपटर समान बोक्ना ‘ह्यान्ड क्यारी’ रहे मोर ठन ।  हम्रे बैडेसिक टालिम ओ अवलोकन भ्रमनमे जाइटहि । हमार जम्मा १२ जन्हुनके टोलि रहे । ओकर अगवाहि संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालयके सहसचिव रुद्रसिंह तामाङ कैले रहिँट । हमार ‘चेक इन’ हुइल । काठमाडौसे मनिला सोझे उडान नैहुइलक कारन हमार बिचका पराव मलेसियाके क्वालालम्पुर एयरपोर्ट रहे । क्वालालम्पुरसे डोसर चिल्गारि बडलि कैना रहे । उहे मारे सक्हुन डुइ डुइठो ‘बोरिङ पास’ ठम्हा डेहल । सक्कुजने आआपन बोरिङ पास गोझ्यइलि ओ आआपन ‘लगेज एयरलाइन्स’के जिम्मा लगाके हाँठे झोला बोक्के आगे परगा नमैलि ।  नम्मा लाइनमे बैठके सुरछ्या जाँच हुइल । ‘इमिग्रेसन’मे सक्कु कागजाट डेखैना काम हुइल । सब काम निप्टाके ‘वेटिङ रुम’मे बैठलि । चिलगारि उर्ना अभिन एक घन्टा रहे । समय रलक ओरसे कोइ गफमे गफे लागल, कोइ आआपन मोबाइलमे चले लागल । मै फेन मोबाइलसे फिलिपिन्सके बारेम जानकारि लेहे लग्लुँ ।  हमार उर्ना समय हुइल चिल्गारि ओर लग्लि । आआपन सिटमे बैठलि । एकघचि परसे चिलगारि भुइया छोरल आसमान छुअल । टिसरा मुलुक गइलक मोर पहिलचो रहे । मैं बहुट हौसल रहुँ । करिब पाँच घन्टाक उरान खाइट पियट आरामसे उर्टि मलेसियक समय अनसार बिहान करिब छ बजेओर हम्रे मलेसिया उटर्लि । वहाँ फे हमार कुछ समय बिसैना रहे । करिब डुइ घन्टाके ‘टूान्जिट’ पाछे फेन मलेसियन एयरलाइन्ससे फिलिपिन्सके मनिला ओर लग्लि । ‘तकरिबन’ चार घन्टाके उरान परसे ‘मनिला एयरपोर्ट’ पुग्लि । बाहर निकर्लि टे संस्ठक मनैं ‘ओलिभर लरेन्स’ हमार कार्यालयक ‘प्ले कार्ड’ लेले बैठल रहे । पहिले फे ओलिभरसे च्याटमे, इमेलसे बाटचिट हुइल रहे । उ फे प्रसिछ्यक हुइलक ओरसे अक्के घचि सक्हुनसे हिमचिम हु गैल । गफसफ कैटि एयरपोर्टसे ‘उर्टिगास ट्वीन टावर’ होटलमे गैलि ।  रिसेप्सनमे सक्कु संघरियन आआपन नाउँ लिखैलि । जनपट्टे एक एकठो ‘पासवर्ड कार्ड’ डेहल जिहिसे कोठक डुवार खोले सेक्जाए । मोरलग यी सिस्टम फे लावा रहे ।  मनिलाके जोँइकहा (ट्वीन टावर) होटलके ४५ औ टल्लाके डिलक्स कोठामे बैठना सुविस्टा मिलाइल रहे । जहाँसे लावा डुल्हनियाँहस सँप्रल, मनिला सहरके रमझमके नजारा हेरे मिले । बैठ्ना कोठामे चाय, कफि, चिनि, पाकेटके डुढ ढैल रहे । अस्टके सन्झाके सिहरा मेटैना डु चार बोटल बियर फे छोटमोट फ्रिजमे ढैलढराइल रहे । पँजरे फोन रहे, जहाँसे घन्टि डबाके आपन मन लग्लक चिजबिज मगाइ सेक्जाए ।  हरेक कोठाक छुटे छुटे ‘पासवर्ड’ रलक ‘सेन्सर’ लागल रलक ओरसे बैठुइया पहुना सुरक्षित महसुस करे सेके वहाँ । आपन कार्डले आपन कोठा बाहेक आउर कोठामे छिर्ना असम्भव रहे । अभिन लिफ्टमे फेन आपन बैठलक टल्ला बाहेक उ कार्डले आउर टल्लाके डुवार नै खुल्ना सिस्टम बनाइल रहे । यहाँसम कि आपन संघरियनके कोठामे छिर्ना फे महा कर्रा रहे ।  पहिल रोज हमार आराम कैना डिन रहे । उ डिन होटलमे आराम कैलि । मनिलामे टालिम फिलिपिन्सके राजढानि मनिलामे डोसर डिनसे हमार टालिम रहे । बैठना होटलसे अस्टे पाँच मिनेट पैडर पुगे सेक्ना ठाँउ आयोजक ‘लोकल गोभर्नमेन्ट एकाडेमी’के हलमे टालिमके सुविस्टा कैगैल रहे । एक डिन सैड्ढान्टिक विसय पर्हना, डोसर डिन फिल्ड घुमे जैना मेरके टालिका मिलाइल रहे । वहाँ जाके आपन खर्च करक लग पहिलहे अफिससे नगड मिलल रहे ।  टालिम कैना ठाउँमे मजा सुविस्टा कैल रहे । कार्यालयके हलमे रलेसे फेन कौनो फाइब स्टार होटलके सुविस्टासे कम नै रहे यहाँ । विग्य अनुभवि सिखुइयनसे टालिम लेके ढेर चिज सिखे मिले । सिखैना टरिका वयस्क सिकाइमे आढारित हुइलक ओरसे समय गैलक पटे नै चले ।  बिहानके कलवा, मिझ्नि, चाय पानिक लग टालिम हलके पँजरे चिटिक्क परल अस्ठाइ भन्सा बनाइल रहे । टाटुल, जुर सब पँजरहे सुविस्टा रहे । रोजडिन मेरमेरके फिलिपिनो खाना । समुन्डरके आँरि टिरके डेस हुइलक कारन खानामे समुन्डरके जिव सालमोन, अक्टोपस, जेलिफिस, झिँगा, गेक्टा, घोँघि टे सामान्य रहे । घोँघि, गेँक्टा नैखैलक आउर संघरियन ठनिक सिकसिक मानिट । मोर टे बचपनसे बान परल खाइट मजा लागे ।   फिलिपिन्सके प्रख्याट खानामसे एक परिकार बालुट हो । एक डिन परिकारके लाइनमे एकठो भाँरा भरके रिझाइल आँरा बाहरसे हेर्लेसे कबरार करिया घोलघोल्हा आँरा हस बिल्गे । खासमे उहिहे जो बालुट कठाँ । हमार सहजकर्टा ओलिभर लारियन बहुट खिटहर रहे । यि खैबो टे टागुट डेहठ, मनैनहे चोटगर बनाइठ कहल । सक्कु संघरियनहे खाइक हौस्याइल । अपने फे महा मिठके खाके डेखाइल ।  मै फे लावा चिज चिखलिउँ कैह्के उठैलुँ । एकठो उस्नल बालुट फोरलुँ टे साँचामे सिर्जल भुट्लहे बच्चा रहे । सस्मे बिलोरके सर्जेहे गच्चसे खाइ पर्ना । मै फे मुहेम डरलुँ । मने महा बिस्साइन्ढ लागल, ओक्लास लक्ना मेरिक । टुरुन्टे उगिल डेलुँ । उ डिन डिनभर जिउ सुक्सुकाइल । खासमे उ बालुट हंसक् बच्चा सिर्जल अन्डा रहे, उसिनके मिठ मानके खैठाँ वहाँक मनै । फिल्डमे घुमे जाइबेर टे जहाँ हो टहाँ उहे बालुट डेखे मिले । टब पटा चलल् कि बालुट हमार नेपालके मःम हस सर्वसुलभ सबजने मन परैना परिकार हो ।  निढरख राट एक डिन संघरियन फिलिपिन्सके राटिक जिन्गि हेरे जाइ कलाँ । मै फेन का कम, संघरयिनसंगे बेरि ओरि खाके निकर्लि । ‘मकाटी’ सहरमे ‘नाइट लाइफ’के मजा लेहे मिलठ कना बाट ओलिभर बटैले रहे । हम्रे ट्याक्सी लेके करिब आढा घन्टाके परसे मकाटी सहर पुग्लि । ट्याक्सीमसे उटरके पैडर घुमे लग्लि ।  टब्बे क्रिसमसके सिजन रहे । चारुओरे झिलिर मिलिर डिया बरल । बरे बरे क्रिसमसके रुखवा ओमहे मेरमेरिक जानवर हाँठि, घोरि, चिरैक बनाइल डिया बरल । जनावर नन्हेँ डिया फेन जिट्टि परानिहस यहोर ओहोर चलट डेखके लागे कौनो चिडियाघरमे बटि । बरे बरे गगनचुम्बि घर, ओमहे चिम्चिमियाँ डिया । बर्का चाकर सरकके आँजर पाँजर, बिच्का खालि भागमे सब झलरमलर डियाले पुरे सहर लावा डुल्हनियाँहस डख्नौस बिल्गाए । चारुओर ढिच्चुक ढिच्चुक डिस्को बाजा बजे ।  मनैनके चहलपहल डेखके राट हो कि डिन अल्गैना कर्रा । ठोरचे डुर गैलि टे ‘डान्स बार’ सुरु हुइल । हरेक बारके आगे टु पिसमे पाँट लागल एकसे एक सुन्डरिन आपन हाउभाउ डेखैटि आँख सन्क्याँइट । कोइ गफमे मस्ट, कोइ अपने अपने ठिट्ठा मारमार हाँसिट । हमार परगा आगे नम्टि गैल । आउर रकम रकमके नजारा डेखे मिलल । एकसे एक सुन्डरिनके बगाल डेखे मिल्ना । विपरिट लिंगि एकठो ठारु–जन्नि आपन आगे कामुक पहिरन ओ हाउभाउमे डेख्लेसे मोहिट हुइना स्वभाविक हो । ओइने आगन्टुक पर्यटकहे मोहिट पर्ले ।   अट्रा सुग्घर सुग्घर बठिनियन रहिँट कि मानो स्वर्गके परिलोग राटके पिरठम्मिमे विचरन करे आइल बटाँ कनाहस । उ बेर स्वर्गमे सयर करेअस लागे । ओइनके हाउभाउ हेरके लागे, मानो वहाँ यौन बजारके मेला लागल बा । जहोर जाउ कामुक मुड्रामे  बठिनिया ठह्र्याइल । उ नजारा डेखके मन नै लल्चैना सायडे कोइ रहठुइ ।  फिलिपिन्समे यौनबजार खुल्ला टे नै हो । टब्बोपर अघोसिट रुपमे यौनबजार बहुट फस्टाइल बा कना पटा चलल् । हम्रे खालि हेरे किल वहाँ पुगल रहि । घुम्ना क्रममे संघरियन कहे लग्लाँ– यहाँ टक आइल बटि टे भिट्टर फे छिरजाइ, बाहर बाहर किल का करे घुमि । सबके सहमटि अन्सार एकठो डान्सबार भिट्टर छिर्लि ।  डान्सबार भिट्रक माहोल आउर हेरे लाइक रहे । डिस्को लाइट, सेक्सि सेक्सि गाना बजटा । उहे गानक सुरमे नर्टकि कामुक हाउभाउमे स्टिलके पोलमे लटपट लटपट कैटि नाचटा । आपन गोप्य अंग भर छोप्ले, बाँकि सब अल्गट्ठे ।  डान्सबार भिट्रक माहोल आउर हेरे लाइक रहे । डिस्को लाइट, सेक्सि सेक्सि गाना बजटा । उहे गानक सुरमे नर्टकि कामुक हाउभाउमे स्टिलके पोलमे लटपट लटपट कैटि नाचटा । आपन गोप्य अंग भर छोप्ले, बाँकि सब अल्गट्ठे ।  हम्रे एकठो सोफामे बैठलि । टब आगैलाँ डुइठो लँवरियन अर्डर लेहे । सक्कुजने एक एकठो फुच्चे बियर ओ खास भुख नै लागल रहे टब्बोपर बियर छिराइक लग ओर्सि फेन्च फ्राइ अर्डर कैलि । हमार अगहवा अर्डर स्लिपमे सहि कैल । वेटर लँवरिया एकघचिक परसे खैना पिना लानल ।  ओहोर स्टेजमे आपन गानामे पालिक पाला एकसे एक सुन्डर बठिनियनके नाच जारि रहिन । वेटर लँवरियन संगे आके बैठ्ना, गफ सफ कैना टे सामान्य रहे । मने कौनो चिजमे जवरजस्टि नै कैना मजा बान । आपन जट्रा मन लागल अर्डर कैना खैना, नैमन रलेसे नाच हेर्ना ओ जैना । कुछ ठप अर्डर करे परल टे अर्डर स्लिपमे आपन सहि अनिवार्य करे पर्ना । सब हिसाब पारदर्शी रलक ओरसे ठगि हुइना डर कम ।   पहिले महि डेखके अचम्म लागल । मनेम सोचु कि का करे सहि करुवइठाँ । मने पाछे पटा चलल ग्राहकलोग बिल टिरेबेर बिल ओ सहि कैल अर्डर स्लिप मिलान कैके भुक्टानि करे मिल्ना । यि चलन महा मजा लागल । नेपालके डान्स बारमे एक हजारके खा पिके चार पाँच हजारके बिल टिरे परलक घटना ढेउर सुन्गैल रहे । लेकिन वहाँ ना कौनो बारगेनिङ, ना कौनो चिटिङ । सब चिज पारडर्सि रना प्रचलन मन परल । फिलिपिन्सके ‘नाइट लाइफ’के भरपुर आनन्ड लेके आढा राट फे टेक्सि लेके आपन होटल ओर लग्लि ।  हैदरावादी विरयानि सुरु सुरुमे टे फिलिपिनो खाना मजे लागल । डुइ टिन डिन परसे  फिक्कल फिक्कल खाना, विना टिना दालके उसिठ उसिठ भात खाइट खाइट सबके ठोँरह टुटगैल । मसलाह खैना बान हमार । वहाँ टे सब साडा, ना नोन ना टेल, ना टे मसाला । बासि, कलवा, मिझ्नि सब जुन भाटे खाइ पर्ना । ठन्चे हुइलेसे फेन भाट अनिवार्य रना चलन । विना डाल टिना अचारके उसिठ भाट किल खाके जिउ मिच्छा गैल ।  सबजने नेपालि खानाके खोजिमे रहि । नेपालि नै रलेसे इन्डियन खाना हुइलेसे फेन मसलहा चटपट खानाके खोजिमे रहि । एक डिन टालिमसे छुटके निकर्लि मसलहा खानाके खोजीमे । हमार टिम लिडर गुगलमे इन्डियन होटल सर्च कैलाँ । महराजा रेष्टुरेन्ट कना पटा लागल । टयाक्सीम करिब २० मिनेट लग्ना रहे । हम्रे सक्कु संघरियन ओँहरे लग्लि ।  गुगल नक्शाके इसारामे खोज्टि उ ठाउँ पुग्लि । वहाँ डाल, भाट टे कहाँ मिलि, परोठा, डोसा, नान, विरियानी अस्टे अस्टे रहे । हमार सबके रोजाइमे हैदरावादी विरयानी परल । मटन विरयानी, डहि अर्डर कैलि । बहुट डिनके खवासल सबजने डिल खोलके खैलि । भुखाइल मनैन खिर पाइलअस लागल ।  पहिल परोसन ठनचेचे रहे हबर डबर खाके अक्के घचि ओरागैल । बरा मिठ लागल फे ठपके पेटभर खैलि । लास्टमे बिल टिरेबेर जनपट्टे करिब २५ सय परल रहे । राम रे यहाँ अढाइ सयमे सिकार, भाट खैलक ओट्रा पैसा टे महा मँह्गा रहे । टब्बोपर खोजल स्वाड पैलक ओरसे डिल खुस हुइल । इ फे जिन्गिक सम्झना बन, एक छाकके ओट्रा मँहगा टिरगैल ।                                                                                                                                                                             लेखक शत्रुघन चौधरी जब लाउ बिल्टल एक डिन बिहाने होटलसे बासि खाके अफिसके गारिमे सक्कु जाने लग्लि समुन्डरके सयरमे । हमारसंगे संस्ठक टिन जाने स्टाफ फे रहिँट एकठो जन्नि ओ डुइ ठारु । हमार मुकाम रहे पटंगास पालम बिच रिसोर्ट । मुकाममे जाइबेर सहरसे निकर्लि टे गाउँ आइल, गाउँ डेखके पुरुबक टराइक याड आए । ठाउँ ठाउँमे टोल चेकपोस्ट ढैल, फराक सरक, सरकके डुनु पाँजर नरिवल, सुपारिक रुखवा सोनमे सोहावन बिल्गे ।  ओस्टक बरे बरे फँटवा, कहु उरुड, कहु अरहर, कहु पर्टि खेटवा, कहुँ टिना फारम, कहुँ फुलक डिहवक सुन्डर मनमोहक ठाउँ रहे । इ सारा नजारा हेरटि करिब डुइ घन्टाके नेगाइसे हम्रे समुन्डरके ढिक्वामे रलक पालम रिसोर्ट पुग्लि । लग्गु छोटमोट बजारमे आआपन लग चाहल ‘स्विमिङ कस्टुम, अन्डरवेर खरिडलि ।  उ डिनके कार्यक्रम एडभेन्चरस नेँग्ना रहे । समुन्डरमे मोटरबोट इन्जिन लागल बनाना बोटके मजा लेना । समुन्डरमे जैनासे आगे लग्गुक रिसोर्टके स्विमिङ पुलमे लहाके एक घचिक जिउ ढिकैलि । ओकर परसे हम्रे समुन्डर ओर लग्लि । ढिक्वामे बनाना बोट लागल रहे । केरा आकार ओ रंग हुइलक ओरसे बनाना बोट नाउँ हुइल हुइहिस कना अन्मान लगैलु ।  लाउमे सिट अन्सार हम्रे १२ जाने सयर करे जाइटहि । इ लाउ मोरलग लावा रहे । आउर लाउ चापर चापर खोङ्च्यार रहठ लेकिन बनाना बोट केरा हस सिलिन्डर आकारके ट्युब ओम्हे हावा भरल । एक जाने बैठे बन्ना ठाउँ छोरके आगे पकर्ना डुइठो हट्ठा फे लगाइल रहे ।  सक्कु जाने ‘लाइफ जाकेट’ घालके बनाना बोटमे बैठलि । मै बिच्चे रहुँ । हमार बगालमे डुइ जाने जन्नि फे रहिँट । भडभडियामे बैठेअस डुनुओर टंगरि कैके बैठे पर्ना । सक्कुजे हट्ठा पकरके अरगरके लाउपर बैठलि । उ लाउहे टानक लग डोसर मोटर बोट रहे आपन पाछे लसरि बाँढके हमार लाउहे टाने लागल ।  समुन्डरमे साहासिक खेल पहिलचो खेलटहि, सक्कु जाने हौस्याइल रहि । जस्टे लाउ मचे ओस्टे मजा आए । हम्रे जट्रे हल्ला करि, चिल्लाइ ओट्रे चलुइयैहे फे जोस आइस काहुन्, मन्के एक्सिलिटर डबाए ओ उर्ना मेरके डौराए । समुन्डरमे साहासिक खेल पहिलचो खेलटहि, सक्कु जाने हौस्याइल रहि । जस्टे लाउ मचे ओस्टे मजा आए । हम्रे जट्रे हल्ला करि, चिल्लाइ ओट्रे चलुइयैहे फे जोस आइस काहुन्, मन्के एक्सिलिटर डबाए ओ उर्ना मेरके डौराए । जट्रे जोरसे डौरे ओट्रे आउर हम्रे सबजे जोर जोरसे चिल्लाइ । लाउ अट्ना टेजसे जाए कि लाउ पानिक सटहसे उप्पर फे उरजाए ।  मै टे टिन जन्हुनके पाछे रहुँ मने अरगर लागे पछिल्का मनैं कबुकाल हाँठ छोरल कलेसे कहाँ गिरल कहाँ नै पटे नै चल्ना मेरके टेजके डौरे । लाउ डौरसे पानिक छल्का छुटे ओ सबके जिउमे छर्र छर्र परे, टब आउर मजा आए । सबजे फे जोस्साके हुटिंग करि । आहा, अट्ना मजा आए कि लागे जिन्गिके सबसे मजा डिन रहे उ । मुहेम पानि फेन छिरे, समुन्डरके पानि नोनखल्लाहे नोनखल्लाह ।  करिब ५ किलोमिटरके डुर टक जैना डग्गर रहिस, उहे डग्गरमे हम्रहिन चार पाँच चक्कर लगाइल । जब अन्टिम फेरा रहे, हम्रे घुमटहि डौर टुफान रहे । लाउ अभिन समुन्डरके बिच्चे रहे । सिढा जैटि जैटि चलुइया एकफाले हैन्डिल उल्टाओर घुमा मारल । हमार लाउ फट्टसे बिलिट गैल । जब समुन्डरमे लाउ बिल्टल, टब साटो हेराइलहस लागल ।  एक घचिक आघक उ जोस जाँगर, उमंग, उल्लास सब समुन्डरमे मिलगैल, माहोल अक्के घचिक सन्नाटामे बडलगैल । अफरा टफरि मचगैल । लाउ अल्गे, मनै अल्गे । सक्कुजे समुन्डरमे उटमुट उटमुट करे लग्लि । उ समयमे महि लागल, आब अट्रै हो जिन्गि । एक घचिक सारा चिज अन्ढार हु गैल ।  जब अचानक डुर्घटना हुइठ टे कौनो चिजके औसान नै आइठ । मै पानिम पौँरहे टे जन्ले रहुँ, मने एक फाले बिल्टलटे हाँठ गोर कुछ नै चलल । सक्कुजे लाइफ जाकेट घल्ले रहि, उ कारन एक घचि रैह्के पानिम टुम्मा उटराइहस फुलुर फुलर उट्रा गैलि । मैं फे उट्रैलुँ, टब मोर हाँठ गोर चले लागल । छाटिसे उप्परके जिउ पानिक बाहर आउर पानिम रहे । पौंरहे लग्लु ढिरेढिरे लाउ पुग्लु । फेन हट्ठा पकरके केँहकुँह कैके लाउमे बैठलि ।  सबजाने डरके मारे लगलग लगलग करटहि । सबके जिउ ठरठर ठरठर कैटि रहे । ना रोइम ना हाँसेम हुइल रहे  । मनेम लागल आझ भगन्वा सोझ रहे, कुछ नै हुइल, भगन्वाँ बचा डेहल । नै टे काल्ह समवेदनाके समाचार बने परट, अस्टे अस्टे बाट मनमे खेले लागल ।  डुइ जाने जन्नि संघरियन, एकठो ठारु संघरिया लाउ पकरे नैसेक्लाँ, ओइने पाछे रहिँट । उहेक मारे बहुट डुर उछिटके गैल रहिँट । ओहाँेर ढिक्वा परसे हम्रहिन कोइ कोइ हेरटि रहिँट । हमार लाउ बिल्टल टे टुरुन्ट डुइठो मोटर बोट लग्गु आ गैल, संघरियनहे फेन निकर्लां । हम्रि उहे बनाना बोटमे ढिक्वा ओर अइलि । पहिले आउर मचा आउर मचा कहुइया संघरियन टे आब ढिरे ढिरे लैजा कहे लग्लाँ ।  लाउ बिल्टलो पर अभिन हौस नै पुगल रहे । ओहेसे ढिक्वामे आके एकघचिक सिंगल बोट राइड कैलि । हमार संगसंगे एक जाने पन्डिट संघरिया रहे, उहिसे मन्ट्र जपके समुन्डरके आँरिटिर शान्ति पुजा कैलि । रिसोर्टमे लहा खोरके फर्छिन हुइलि । सक्कु जाने चलुइयाहे गरियइलि ।  पाछे पो पटा चलल कि उ अचानक हुइलक डुर्घटना नै रहे । वहाँ टे जान बुझके अचानक बिल्टैना चलन पो रठिन । लाउ सिंउर सेकल पुरान मनैं कहे लग्लाँ– यकर मजे इहे हो । पाछे पो पटा चलल कि उ अचानक हुइलक डुर्घटना नै रहे । वहाँ टे जान बुझके अचानक बिल्टैना चलन पो रठिन । लाउ सिंउर सेकल पुरान मनैं कहे लग्लाँ– यकर मजे इहे हो । पहिलेहे बटा डेलेसे फिक्कल हु जाइट कटिहुन । उहेक मारे बिन बटाइल एकचो लाउ बिल्टैठाँ । जे अप्नहे जानल टे जानल नै टे डुर्घटना मानल । हमार कलवा टयार रहे, पालम रिसोर्टमे कलवा खैलि । टब फेर मनिला ओर लग्लि ।  एशियाके सबसे भारि मल मोर जिन्गिमे पहिलचो एशियाके सबसे भारि मलमे बजार खेल्ना मौका मिलल रहे । उ मलके नाउँ ‘मल अफ एशिया’ हो, जहाँ एक चोटिम २० हजार मनै बजार खेले सेक्ना । हम्रे फेन एकडिन समय निकारके ओहाँ घुमे गैलि । मल भिट्टर छिरलेसे कहाँ हो कहाँ । जहोर हेर्लेसे अक्केमेर बिल्गना । हम्रे करिब २ घन्टा जट्रा घुम्लि, मने एक फलाटके एक कोन्वामे किल ।  अस्टके हमार बैठना होटलके पँजरे डोसर बर्का मल रहे । उ फे बहुट बरा रहे, जहाँ हम्रे सुरुवाटि डिनमे भुलाइल रहि । हमार ठन केक्रो मोबाइल फोन नै रहे । सिमकार्ड टे लेले रहि, मने नम्बर साटासाट नै कैले रहि । टालिम ओराके कोठामे आइबेर मल घुमि कैह्के छिरलि । उ मलके नाउँ मेगा मल रहे । हम्रे नेँगट नेँगट भिट्टर जाइल कैलि मनै छुट्टि गैलाँ ।  घुमट घुमटसमय विटलक पट्टे नै मिलल । साँझके बेरि खैना समय हुइटहे हडबड हडबड निकर्ना खोजे लग्लि । घुमघुमके उहे जगा जाइ । अपने अपने हाँसि, जहाँ जाइ सबओर अक्के बिल्गे । हमार समुहमे ४/५ जाने रहि । मने केउ फे सहि डग्गर पटा लगाइ नै सेकल । हम्रहिन होटलके नाउँ याड रहे । टब गार्डसे पुँछलि टिवन टावर होटल जैना गेट कौन हो । उ हाँठले इसारा कैल, महा डुर । पुँछट पुछट बल्ले टल्ले होटल जैना गेटमे निकर्लि, टब कहाँ साँस आइल ।  ऐतिहासिक रिजाल पार्क टालिमके डौरानम एक डिन रिजाल पार्क, मल अफ एशिया ओ ओकाडा होटलके वाटर फाउन्टेन हेरे जैना कार्यक्रम रहे । मल अफ एशिया जैना डगरेम रिजाल पार्क परलक ओरसे गारि रुकाके पार्क घुमे गैलि । पर्यटकिय छेट्रा घुमे जाइबेर अफिसके एकठो टुरिस्ट गाइड फेन रहे । हम्रहिनहे घुमैना वहाँक बारेम बटैटि भिट्टर लैगैल । रिजाल पार्क फिलिपिन्सके सहिड जोसे रिजालके सम्झनामे बनैलक पार्क हो । उहे जगामे उ आपन डेसके स्वटन्त्रटाके लग लरट लरट सहिड हुइल रहिँट । करिब ५८ हेक्टर ठाउँमे फैलल उ पार्क एक मेरिक ऐतिहासिक संग्रहालय फे हो । फिलिपिन्स स्वटन्त्र हुइनासे पहिले अठारौ सटाब्डिमे स्पेनके उपनिवेस रहे । अस्टके स्पेन ओ अमेरिकाके लराइके चपेटामे फे फिलिपिन्स परलक इतिहास बटिस । पाछे कुछ समय अमेरिकाके फे उपनिवेस रहे ।  सन् १९४६ मे फिलिपिन्स स्वटन्त्र हुइलक घोसना हुइल रहे । फिलिपिन्स फे बहुट लराइ कैके आजुक अवस्ठामे आइल बा । वहाँक संग्रहालय फिलिपिन्सके इतिहास बोक्ले बा । सहिडके स्मारक, लराइ खेल्लक घर, भिटामे गोलिक छर्रा लग्गक खोभल्टा, डुस्मनसे बचक लग बनाइल बन्कर, बरे बरे टोप ओ टोपके गोला अभिन जसके टस डेखे मिलठ । सहिड रिजालके विद्रोह कैलक सुरुवाटि डिनसे सहिड हुइलक टकके फोटु, मुरट, डस्टाबेज सजोग लगके ढैल बा ।  उ पार्कके भिट्टर जैनासे पहिले पहुना पर्यटकहे गुट गुट बनाके करिब १५ मिनेटके डकुमेन्टि डेखाजाइठ । उ छोट भिडियोसे पार्कके बारेमे, फिलिपिन्सके इतिहासके बारेमे बुझ्ना बहुट सजिल हुइठ । भिडियो हेरके कौटुहलटा बर्हल रहठ, ओकर पाछे सोझे ठाउँ पुगके  हेरबो टे आउर मजा आइठ ।  थरुहट क्षेत्रके जंगलवा कुटी, चखौरा थारु संग्राहालय, घोरिघोरा ताल, गढीमाइ जसिन ऐतिहासिक, ढार्मिक ठाउँमे पहुननहे छोटछोट भिडियो डेखाइ सेक्लेसे उ ठाँउक महट्व आउर बर्हाइ सेक्जाइट कना लागठ ।  हमार डेसमे फे बहुट ऐतिहासिक ढरोहर बा जस्टे कि पाटन दरबार, नारायण हिटी संग्रहालय, हनुमान ढोका आदि ऐतिहासिक ठाउँ हेरुइयनहे छोट भिडियो क्लिप डेखाइ सेक्लेसे उ ठाउँक महट्व आउर बर्हट कना हस लागठ ।  अस्टक थरुहट क्षेत्रके जंगलवा कुटी, चखौरा थारु संग्राहालय, घोरिघोरा ताल, गढीमाइ जसिन ऐतिहासिक, ढार्मिक ठाउँमे पहुननहे छोटछोट भिडियो डेखाइ सेक्लेसे उ ठाँउक महट्व आउर बर्हाइ सेक्जाइट कना लागठ ।  ओरौनि हमार डुइ अँठवारके बैठाइ आढा टालिम लेना ओ आढा अवलोकन भ्रमन कैना हुइलक ओरसे फिलिपिन्सके नेगाइ बहुट याडगार हुइल । टालिमके डौरानमे लावा लावा सिख्खा सिखे मिलल । अस्टके वहाँक जनप्रतिनिधिन जनटन कटना मन्ठाँ कना डेखे मिलल । ‘भेलेन्जुयलक मेयर’ राटडिन जनटनके सेवम खटल वर्नन सुनगैल । हम्रे वहाँ जाके अवलोकन फेन कैलि, कार्यालयक कर्मचारि सेवाग्राहिमे बहुट सम्बेडनसिल । काम लेना सहज हुए कैह्के सक्कु फाँट अक्केठन बनाइल । हरेक फाँट सेवाग्राहिनके सुझाव लेहक लग फारम ढैल सक्कु जाने सेवा कसिन हुइल कैह्के फारममे आपन मजा नैमजा अनुभव लिखे मिल्ना, कहे मिल्ना सिस्टम मजा लागल ।  वहाँक मनैन्के चहा जिहिसे हाँसके बोल्ना ओ सक्हुन सम्मान कैना बोलि व्यवहार तारिफयोग्य लागल । सरकमे फे डग्गर काटेबेर गारिक स्पिड डुरेसे स्लो कैना, जेब्रा क्रसमे ढिरे ढिरे सवारि चलैना, बस स्टपमे बस चौँरहक लग लाइनमे बैठल रना । समग्रमे कना हो कलेसे फिलिपिन्स भ्रमनसे ढेर सिखाइ हुइल । इ भ्रमनहे एक्ठो बरा उपलब्ढिके रुपमे लेले बटुँ । देउखर, पिपरी, हालः कीर्तिपुर, काठमाडौं साभारः लावा डग्गर त्रैमासिक  अंक ४८ (२०७८ काट्टिक, अग्हन ओ पुस)  

कोपिलाके ‘हमार संस्कृति’मे एक लजर

कोपिलाके ‘हमार संस्कृति’मे एक लजर

१६० दिन अगाडि

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१३ मंसिर २०८२

२०५९ सालमे मुक्तिक खोज उपन्यासमार्फत् थारू साहित्यके फँटुवामे पैला ढारल छविलाल कोपिला संयुक्त संग्रह लगाके दर्जनसे ढेर पोस्टा निकार सेक्ले बटाँ । उपन्यासबाहेक उहाँक आकुर पोस्टा खासकैके कविता बिधामे केन्द्रित बटिन् । उहाँ साहित्यकार व्यक्तित्वके अलावा पत्रकार व्यक्तित्वसे फेन परिचित बटाँ । आजकल लावा डग्गर त्रैमासिकमार्फत् साहित्यिक पत्रकारितामे उहाँक् पैला आगे बह्रल बटिन् । इहे सिलसिलामे उहाँक् ‘हमार संस्कृति’ नामक् खोजमूलक लेख संग्रह २०७१ वैशाखमे प्रकाशन हुइल बा ।  पत्रकारितामे लेख लिख्ना सिलसिलामे समसामयिक बिसयमे कलम चलैना एकठो बाट, मने पत्रकार मनै आपन लेखके छुट्टे संग्रह जो निकारेबेर सन्दर्भ स्रोतमे बहुट ध्यान पुगाइ परठ । यम्ने सन्दर्भ सामग्रीके उल्लेख हुइल बा । ओहेसे इ पोस्टा थारू सांस्कृतिक लेखके लग महत्वपूर्ण दस्तावेज ओ संग्रह करे लाइक बनल बा । इ पोस्टामे १९ ठो सांस्कृतिक लेख संग्रहित बा । थारू जातिनके लोकगीत, संस्कृति ओ गीतिसाहित्य सिर्सकके पहिला लेखमे ढेर बाट अँट्वइना प्रयास कइगैल बा । थारू समुदायमे लोकगीत कहटि कि गीतिसाहित्य ओस्टे आ जाइठ । उप्परसे संस्कृति बिसय जोरटि कि यकर फैलावट ओस्टे बह्र जाइठ । ओहेसे इ लेख कुछ छ्र्यासमिस लागठ । मने थारू समुदायमे गा जैना टिउहारगीत, ऋतुगीतलगायत मेरमेरीक गीत, नाचके बारेम कुछ आख्यान सहितके वर्णन लेखहे खोजमूलक बनैले बा ।  जहाँ सजना गैलेसे पानी बर्सठ्, सिर्सकके डोसर लेखमे गोरु बेह्रना चलनके बारेम उल्लेख बा ।  गोरु बेह्रना चलनहे कहुँ कहुँ गैया बेह्रना फेन कैह जाइठ । इ चलन कहियासे ओ कसिक चलल् ? यकर उत्तर खोज्ना प्रयास कैगैल बा । इ लेखके कमजोर पक्ष गोरु बेह्रेबेर गा जैना सजनाके सप्रसंग व्याख्या नइ हो । सजनामे जन्निन्के जौन बिरह बेदना रठिन, ओकर व्याख्या छुट्टे पोस्टा जो बन सेकठ ।  महाभारतके प्रारुप बर्का नाच टिसर लेखमे खास कइके डस्या ओ डेवारीम नाचजैना महाभारतके कथावस्तुसे जोरगैल बर्का नाचके बारेम बा । इ नाच आब केवल दाङदेखउर, घोराही उपमहानगरपालिका, जलौरा गाउँमे किल नाचजाइठ कना लेखकके कहाइ बटिन ।  मै सुनल अनुसार बर्दियाके उल्टनपुरमे फेन बर्का नाच कैना चलन रहे । बर्का नाचके बारेम कुर्ट मेयर ओ पामेला डुयल अंग्रेजी संस्करण महाभारतः द थारु बर्का नाच (२०५५) मे पोस्टा निकारके अन्तर्राष्ट्रियकरण कर्ले बटाँ । असिन आउर ढेर थारू लोकगीत, नाचके बारेम अन्तर्राष्ट्रियकरण करे पर्ना जरुरि बा । थारू समुदायमे भोज—वियाह ओ थारू समुदायमे भोंर—पैठ्ना चलन, इ छुट्टाछुट्टे लेखमे मेरमेरिक भोज कैना चलनबारे वर्नन बा । पहिला लेखमे ठोकौनिसे, विदाइ समके बाट ओ माँगरके चर्चा ढेर बा । डोसर लेखमे भोंर पेलल् बाबासे हुइल लर्कापर्का, भोंरपैठा स्वयम् अंशके दावेदार हुइ नइ पैना कानुनी समस्याके जटिललताके बारेम लेखक अंग्रेयइले बटाँ ।  छैठौसे बाह्रौ लेख थारू समुदायमे मनाजैना टरटिउहारके बारेम केन्द्रित बा । जेम्ने गुर्ही, अष्टिम्कि, अँट्वारि, डस्या  डेवारि, माघ ओ ढुर्हेरि मनैना चलनके बारेम खोज कैगैल बा । यम्ने थारू जलम संस्कार ओ मृत्यु संस्कार बारेम फेन छुट्टाछुट्टे चर्चा बा । टरटिउहार असिक मनैठाँ, ओसिक मनैठाँ कना छिछलि चर्चासे लेख कुछ उप्पर उठ्लेसे फेन थारू समुदायमे मनाजैना टरटिउहार आब् कसिक रंग बड्लटा ? उ बड्लाउ का अर्थ राखठ ? इ बारेम चिन्तन मनन कम बा ।  जस्टे कि माघ टिउहारके चर्चा । माघ डेवानिके भुरा खेलमे गाउँक् अगुवा बरघर चुनजैना प्रसंग टे यहाँ बा, मने थारू गाउँक् अगुवाइ आब गैरथारून्के हाँठेम् जाइटा । इ सवालमे बहस कर्ना कि नै कर्ना ? मुक्त होके कमैयन् गाउँक् अगुवाइ अपनेहे कैके सभासदसम बन्टि बटाँ । मने आम थारू अगुवन् बरघरमे किल सीमित बटाँ, ओइन चुनावमे गोटि किल बनाजाइटा । माघ डेवानिके अवसरमे आपन मुद्धा, आपन नेतृत्व इ सवालमे बहस कर्ना कि नै कर्ना ?  ओस्टक जरुरी बा– अष्टिम्कि, अँट्वारि, डस्या  डेवारि, माघ ओ ढुर्हेरिम बनाजैना परिकारके व्यावसायिकताके चर्चा फेन । लेखकके चिन्तन बटिन कि थारू समुदायमे विकृति बन्टि जाइटा जाँर डारु । इहे हो थारून् कमैया, कमलहरी बनुइया । महि लागठ, कुछ प्रतिशत यकर फेन हाँठ हुइ सेकठ, मने वास्ताविकता का हो कलेसे राज्यके नीति जो थारून् गरिब बनाइल, ओइनके मोहियानि हक सुरक्षित नै करल । ओइन मतवालीमे गरना करल । धर्म, थारू समाज ओ वास्तविकता इ लेखमे थारू जाति किल नाहि, अन्य समुदायके मनै फेन पुरान, रुढिवादी ओ अन्धविश्वासमे अन्धभक्त होके दुःख पैलक बाट उठागैल बा ।  थारून्के धर्म का ? यकर बारेम कौनो चर्चा नइ हो ।  थारू भासा ओे पत्रकारिताके अवस्था लेखमे लेखकके ठहर बटिन कि थारू भाषक् पत्रिका संख्यात्मक हिसाबसे ढेर प्रकाशन हुइल बिल्गैलेसे फेन गुणस्तर ओ निरन्तरताके हिसाबसे बहुट नाजुक अवस्था बिलगाइठ, इ सोह्रे आना सहि हो । मने हालसम कठेक थारू पत्रिका निक्रल, उ खुलाइल नइ हो । गुणस्तर ओ निरन्तरता कसिक कायम कर्ना यकर कौनो उपाय नइ सुझाइल हो । हमार कला, साहित्य ओ संस्कृति लेखमे बर्गीय साहित्यके चिन्तन बा । हाल आधुनिकताके नाउँमे संस्कृति परिवर्तनमे डेख्गैलक विकृतिक् बारेम टिस्लार प्रहार बा । थारू पहिचानके धरोहर जंगलकुट्टी  ऐतिहासिक पर्यटकीय क्षेत्रके परिचयात्मक जानकारि डेहल इ पोस्टाके पुछ्यावन लेख हो । मोर जानकारि अनुसार इ लेख कार्यपत्र हुइल ओरसे आउर लेखसे गरु बा ।  यम्ने संकलित लेख पहिले कहाँ कहाँ छपल रहे ? ओकर सुचि फेन डेहल रहट टे उचित हुइना रहे । कौनो कौनो लेखमे फोटु नइ हो । मने ढेरहस लेखके बिच बिचमे डेगैल फोटु पोस्टाहे आउर वजनदार बनैले बा, यद्यपि छपाइमे फोटु ढुमिल बा । फोटु मौलिक हो या औरे जन्हक साभार ? इ फेन अनिवार्य खुलाइक चाहि । काजेकि आब मनै अपन फोटुक कपिराइट खोजे लागल बटाँ । हमार संस्कृति इ पोस्टा मातृभासा थारूमे जो अनुसन्धानमूलक कृतिके लावा परम्परा बैठाइल ओर्से लेखक धन्यवादके पात्र बटाँ ।  अन्तमे, छविलाल कोपिला अनुसन्धानकर्मीके परिचय इ पोस्टामार्फत् उजागर कर्ले बटाँ ।  महि अस्रा बा, पत्रकारिता ओ साहित्यकारके पगरिसंगे अनुसन्धानकर्मीके पगरिहे उहाँ अइना डिनमे फेन निरन्तरता डिहिं । थारू समुदायके ढेर बखारि उहाँक् मनेम भरल बटिन । उ बखारिमे घुन लगैनासे आम पाठकमे बँटहि ओ खोजमूलक लेखनमे निरन्तर लग्हि, बहुट बहुट सुभकामना । ओ इ पोस्टाहे प्रकासनमे सहयोग करल आदिवासी जनजाति उत्थान राष्ट्रिय प्रतिष्ठान धन्यवादके पात्र बा ।  (पोस्टाके भूमिकासे, कुछ संसोढिट)  

संगीतमा ‘एआइ’को उच्छृङ्खल प्रयोगः कला, संगीत र साहित्यको अपमान

संगीतमा ‘एआइ’को उच्छृङ्खल प्रयोगः कला, संगीत र साहित्यको अपमान

१७१ दिन अगाडि

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१ मंसिर २०८२

                                           एआइबाट बनाइएको गीतकार महेश कुचिलाको ‘मान लेनु साथी टुहार’ बोलको थारु भाषाको गीतको भिडियोको दृष्य । सञ्जय सुमन आजको प्रविधिक युगमा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ले जीवनका धेरै क्षेत्रमा क्रान्ति ल्याइरहेको छ। तर सबै क्षेत्र प्रविधिद्वारा प्रतिस्थापन हुन उपयुक्त हुँदैनन्। तीमध्ये सबैभन्दा संवेदनशील क्षेत्र हो—गीत–संगीत। कलाको आत्मा मानवीय अनुभूति, साधना, र सांस्कृतिक चेतनामा बसेको हुन्छ। यिनै कारणले धेरैको दाबी छ कि गीत–संगीतमा एआईको प्रयोग गलत हो र यसले संगीत साधक तथा संगीतकर्मीको अवमूल्यन गर्छ।  संगीत केवल धुन र तालको संयोजन मात्र होइन; त्यो हृदयको संवेदना, पीडा, आनन्द तथा व्यक्तिगत यात्राबाट जन्मिएको कला हो। एआईले लाखौँ डाटाबाट नयाँ धुन ‘जेनरेट’ गर्न सक्छ, तर अनुभूतिद्वारा जन्मिएको संगीत सिर्जना गर्न सक्दैन। मानवीय आत्मा नभएको कलालाई वास्तवमै “संगीत” भन्न मिल्छ ? यही प्रश्नले एआई संगीतको वैधतामा शंका उत्पन्न गर्छ। एक संगीतकारले स्वर, ताल, लय, र प्रस्तुतीकरणमा पुग्न वर्षौँसम्म निरन्तर साधना गर्छन्। पछिको पुस्तालाई प्रेरणा दिने यही संघर्ष हो। तर एआईले एक क्लिकमा गीत सिर्जना गर्न सक्छ। यसले कलाकारको सीप, समय, मेहनत र समर्पणको मूल्य घटाइदिन्छ, किनकि बजार उत्पादनमुखी बन्दै जाँदा “द्रुत उत्पादन” लाई प्राथमिकता दिन थाल्छ। एआईले सिक्ने आधार फेरि मानवकै सिर्जना हो। एआईद्वारा बनेका धेरै गीत–धुनमा प्लेजरिज्मको जोखिम उच्च हुन्छ। मौलिकता कमजोर हुँदै जाँदा सर्जकको पहिचान ओझेल पर्न सक्छ। संगीत कला हो, तर एआईले संगीतलाई डाटा प्रवाह बनाइदिन्छ। न मौलिकता, न सांस्कृतिक आत्मा—कला केवल मिश्रणको परिणाम बन्न पुग्छ ।  संगीतकार, गीतकार, एरेंजर, कम्पोजर, स्टुडियो टेक्निसियन, सेसन प्लेयर—यी सबै पेशा मानवीय सर्जनात्मकतामा आधारित छन्। एआईले यिनका धेरै भूमिकालाई सस्तो, छिटो र ‘परफेक्ट’ भनेर प्रतिस्थापन गर्न थालेपछि हजारौँ कलाकारको रोजगारी प्रभावित हुन्छ। संगीतको बजारमा आर्थिक असमानता बढ्दै जान्छ—प्रविधि कब्जा गर्ने थोरै कम्पनी वा व्यक्ति फाइदा लिन्छन्, तर कलाकारहरू पछाडि धकेलिन्छन्। हाम्रो संस्कृति, लोककला, र परम्परा मौखिक र प्रयोगात्मक अभ्यास मार्फत बाँचेको छ। यदि एआईले भजन, लोकगीत, तीज, सोरठी, चौथी, अरनिको शैली, गण्डकी लोकधुन जस्ता परम्परागत स्वरूपलाई ढाँचाबद्ध मात्र बनाइदियो भने मनको भावना हटेर संस्कृति डिजिटल आर्काइभको वस्तु बन्ने जोखिम हुन्छ। मानिसले बनाई राखेको संगीतलाई मेसिनले पुनःपरिभाषित गर्न थाल्नु सांस्कृतिक क्षति हो । एआईले सिर्जना गर्ने गीतको उत्तरदायित्व कसको ? यदि धुन चोरी भयो भने ? यदि गीतले गलत सन्देश दियो भने ? कलाकारसँग नैतिक दायित्व हुन्छ; एआईसँग हुँदैन। यसले संगीतलाई जिम्मेवारीविहीन उत्पादन बनाइदिन सक्छ।

थारू मौलिक संगीतको झंकार

थारू मौलिक संगीतको झंकार

१७८ दिन अगाडि

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२४ कात्तिक २०८२

एआइबाट बनाइएको ‘मान लेनु साथी टुहिन’ बोलको थारू भाषाको गीत यसै साता युट्युबमा अपलोड भयो । महेश कुचिलाको शब्द, संगीतमा रहेको गीतको उत्कृष्ट भिडियोले पनि यो सर्वत्र चर्चामा छ । यसको देखासिकीमा थारू स्रष्टाहरूले आफ्ना गीत धमाधम एआइबाट गाउन लगाइरहेका छन्, भिडियो विना पनि युट्युबमा अपलोड गरिरहेका छन् । त्यसो त एआइले थारू शब्द सही उच्चारण नगरेको बहसको अर्को पाटो पनि सुरु भएको छ । एआइको सहायताले बनाइएका थारू गीतले जेनजी पुस्तालाई अवश्य आकर्षित गरेको छ । तर, खासमा यसले थारू मौलिक संगीतको झंकार बोकेको रैथाने संगीत थप ओझेलमा पर्दै गरेको अवस्था छ । यस आलेखमा थारू रैथाने संगीतबारे चर्चा गरिएको छ ।  थारू रैथाने लोकनाच भनेर मित्र नविन विभासले चितवन, नवलपरासी क्षेत्रको लट्ठी नाच आफ्नो युट्यूबमा हालेका छन् । सौराहा जाने र त्यहाँको होटलमा एक रात बिताउने जो कोही पर्यटक ढोलकको तालमा लट्ठी फन्नाउँदै नर्तक, नर्तकीहरू बडो जोशका साथ नाचेको अवश्य हेर्नु भएको होला । अध्येता सुशील चौधरीका अनुसार लट्ठी नाच विशेष युद्धकलासँग सम्बन्धित रहेको छ । जंगली जनावर धपाउने र दुश्मनलाई परास्त गर्न अभ्यास गर्दै जाँदा यो नृत्यको विकास भएको मानिन्छ ।  नाच्ने ताल फरक छ । यद्यपि थरुहटको सबैजसो क्षेत्रमा लट्ठी नाच चलनमा छ । दाङदेउखुरी भन्दा पश्चिम थरुहटमा ढोलक होइन, मादलको तालमा लट्ठी नाच नाचिन्छ । डफ गीतमा डफ बाजाबाहेक अन्य सबै नृत्यमा मादलको प्रयोग हुन्छ । नृत्यको शैलीअनुसार मन्जिरा, झाल, कस्टार, बसियालगायत बाजाको प्रयोग हुन्छ । बिरह गीतमा कुमालेले बनाएको ढुकुर आकारको पिलरु बाजा बजाइन्थ्यो, जुन अब देख्न पाइदैन ।  पश्चिमा थारू समुदायमा झुमरा, लट्ठी, मुङग्रह्वा, हुर्डुङ्ग्वा, झर्रा, मघौटा, बर्का, छोक्रा, कठ्घोरी लगायत नृत्य रहेको छ । त्यसैगरी दशैँँमा नयाँ गुरुवा (धामी) बन्न नाचिने अखरिया तान्त्रिक नृत्य हो । यसलाई शिवको रौद्र रूपमा नाचिएको ताण्डव नृत्यसँग तुलना गर्न सकिन्छ । ‘झ्वाङ झ्वाङ नक’ मादलको तालमा गुरुवा बन्न चाहनेहरू नाच्छन् । यो सँगै मुख्य गुरुवाले पचरा मन्त्र वाचन गर्दछन् । २०६२ सालमा यो पंक्तिकार नेपालगञ्ज मिडिया सेन्टरमा थारू भाषाको रेडियो कार्यक्रम ‘हमार सहिडान’ कार्यक्रमको उत्पादक थियो । संकलन गरेर ल्याइएको पचरा मन्त्र स्टुडियोमा सम्पादन भइरहेको बेला ‘हमार सहिडान’ कार्यक्रमको नाटक टोलीका सदस्य सोमलाल चौधरीलाई गुरुवा चढ्न पुगेको थियो । मन्त्र बन्द गरेपछि मात्रै उनी बिस्तारै काम्न छोडेका थिए । यसले थारू रैथाने गीत, संगीतको शक्ति सावित गर्दछ ।  हुर्डङ्वा नृत्य फूलवार लोककाव्य गायन गरी नाचिने प्रसिद्ध नाच हो । बर्कीमार अर्थात्् थारू महाभारतको बर्का नाच थारू समुदायको शास्त्रीय नृत्य हो । बर्का नाच, लट्ठहवा, मुंग्रह्वा, सखिया नाच बर्का पैयाँ खोट (ताल) मा नाच्ने चलन रहेको छ । सखिया नाच थारूहरूको भागवत पुराणमा आधारित नृत्य हो । कठघोरी नाचमा बाँसले घोडाको आकार बनाई त्यसलाई थारू नर्तकहरूले आफ्नो काँधमा भिरेर मादलको तालमा नाच्छन् । हातमा काठको मुङग्रा लिइ नाच्ने नाचलाई मुङग्रहवा भनिन्छ । झर्रा नाचमा नाच्नेहरू हातमा बाँसको मसिना सिन्काबाट बनाइएको दुवै हातमा एक एक मुठा झर्रा लिई नाच्छन्, जसलाई आपसमा हिर्काउँदा झर्राउने स्वर आउँदछ । यसै स्वरको आधारमा झर्रा नाच भनिएको हो । थारूहरूको नयाँ वर्ष माघ (माघी) को अवसरमा नाचिने नाचलाई मघौटा नाच भनिन्छ । मघौटा नाच नाचेवापत घरमुलीले दीपावलीमाझैं ढक्कीमा चामल, खानेकुरा र दक्षिणाको रूपमा नगद दिन्छन् ।  झुमरा, छोकरालगायत नृत्य बाह्रैमास नाचिन्छ । हाल मागअनुसार विभिन्न कार्यक्रममा प्रदर्शनीका लागि लगिने भएकाले अन्य नृत्य पनि बाह्रैमास नाच्न थालिएको छ । झुमरा नाचमा एकजना मादले, एक वा दुर्ईजना नाच्ने महिला हुन्छन् । कहिलेकाही मनोरञ्जनका लागि सोंगिया (जोकर) पात्र पनि हुन्छन् । छोक्रा/छोकरा भनेको एक अर्थमा केटा हो । पुरुष नर्तकहरूले महिलाको पोशाक लहँगा, चोलो, अघरान, चुरा, टिकुली आदि गहना आदि लगाएर विशेष प्रकारको तालमा नाच्ने एक लोक नृत्यलाई छोकरा भनिन्छ । त्यसो त झुमरा नाचमा पनि पहिले पहिले पुरुष नै महिलाको पोशाक लगाएर नाच्ने गर्दथे । झुमरालाई स्थान विशेषअनुसार झुमरी, झुमर, धुमर, धुमरा नाच पनि भनिन्छ । थारू समुदायमा ऐतिहासिक महत्व राख्ने बर्का नाचमा महाभारतको कथावस्तुलाई समेटेर नाचिन्छ । सबैजना पुरुषमात्र रहने यस नाच टोलीमा सयभन्दा बढी वा सो हाराहारीमा नाच्नेहरू हुन सक्छन् । त्यसैले यसलाई बर्का अर्थात् ठूलो नाच भनिन्छ । दशैँँको अवसरमा नाचिने यो नाचको लागि आर्थिक भार बढी, तन्त्र मन्त्रको प्रष्ट ज्ञान, धेरै सदस्य र प्रतिबद्धताको जरुरत पर्दछ । यो नाच गर्नुभन्दा पहिले गुरुवा (धामी) हरूले विभिन्न थरिका पूजा र बलीहरू चढाउँछन् । बर्का नाचलाई दाङ, जलौराका चन्द्रप्रसाद चौधरीको टोलीले मात्रै जोगाएको छ । लट्ठी, बर्का, लट्ठहवा, मुंग्रह्वालगायत नाचमा मादले र नाच्नेहरू जिउमा रंगीविरंगी कमिज, पिठ्युँमा मयुरको प्वाँख, दुवै काखीमा रातो सप्को, टाउकोमा फुन्ना लगाइएको टोपी वा सेतो वा रंगीन पगरी, नाडीमा फुन्ना लगाइएको कन्ठी, घाँटीमा फुन्ना लगाइएको गर्‍याला, कम्मरमा छोटोखाले धोती, खुट्टामा चप्पल या जुत्ता, कम्मरमा ठूलो खाले पेटीमा उनको घुँघरु र थरीथरीका गहना लगाएका हुन्छन् । मादलेहरूले पनि कम्मरमा विशेष श्रृङ्गार गरेर मादल भिरेका हुन्छन् । यसले थारू  समुदायको परम्परागत पोशाकको पनि प्रतिनिधित्व गर्छ ।  मादलको २२ ताल  ‘थारू संस्कृतिमा कृष्णचरित्र परम्पराको अध्ययन’ (२०७६) शीर्षकमा नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालयबाट विद्यावारिधि गर्ने क्रममा यो पंक्तिकारलाई थारू गीत, संगीतबारे पनि विशद् अध्ययन गर्ने मौका जुरेको थियो । दशैंमा नाचिने सखिया नाचमा २२ खोट (ताल) मादल बजाइन्छ । मेरो क्षेत्रकार्य रहेको दाङको घोराही उपमहानगरपालिकाको राजपुर गाउँका कालीप्रसाद चौधरीले मादलको तालको दस्तावेजीकरण गर्ने क्रममा १४ खोट मादलको ताल मात्र बजाउन सकेका थिए । उता गाउँमा सामूहिक नाचको क्रममा ७ खोट मात्रै मादलको ताल बजाइएको पाइएको थियो ।  झोङ्नक–झोङ्नक, टोङ घडोनक् टोङ, झोङ्नक घिल्डोक नक मादलको ताल सुन्ने बित्तिकै थारू  सखिया नाच भन्ने स्वतः बुझिन्छ । सखिया नाचको पुरै २२ खोट बजाउने मादले हराउँदै गएकोमा यो पुरै बजाउने को पो होला ? खोजी पस्दै जाँदा बर्दियाको बह्रैयाताल गाउँपालिका मयूरबस्तीका अभिन्न मित्र सुशील चौधरीले गाँठो फुकाइ दिए । उनले २२ ताल बजाउँदै त्यस तालको नामकरण पनि गरे । यसको नाम मात्रै सुनेर पनि नाचको शैली थाहा पाइन्छ । जस्तो कि चोल बुडी मड पिए अर्थात् हिँड हजुरआमा रक्सी पिउन तालको मादलले बुढाबुढीलाई हौस्याउँछ । हात्तीको हिँडाइ जस्तो लमक लमक, भेंडा घुमाउनेदेखि कुखुराको जुधाइसम्म नाचिने ताल छ । एक खुट्टाले उफ्रिदै लाइनमा छिर्ने, मादले र नर्तकी टाउको जोड्दै नाचिने, नर्तकीलाई लखेट्ने ताल छ । त्यस्तै, कानतिर संकेत गर्दै नाचिने, सैनिक परेडझैँ नाचिनेदेखि उफ्रिएर कुलो पार गरेजस्तो, छुपुछुपु रोपाइको शैलीको नाचको ताल पनि छ । उता बन्दुक ताकेझैँ, पंक्षी उड्दै गरेको शैली अनि परेवा जोडीले माया गरेझैँ नाचिने ताल पनि छ सख्यामा । यसबारे बिस्तृत कुनै अर्को लेखमा लेखौंला ।  नेपाली लोकसाहित्यमा पहिलो विद्यावारिधि गरेका दाङका डा गोविन्द आचार्यका अनुसार दशैं तथा तिहारको अवसरमा नाचिने थारू सखिया, पैंयाको संगीत सहितको गीत श्रवण गर्दा उनलाई मीठो निद्रा पर्ने गरेको छ रे । उनको भनाई छ, ‘निद्रा बोलाउने आफ्नो मौलिक रैथाने संगीत फालेर थारूहरूको नयाँ पुस्ता निद्रा बिगार्ने आधुनिक गीत संगीतको लतमा फस्दै गइरहेको देख्दा दुःख लाग्छ ।’ साभारः कान्तिपुर कोसेली, २०८२ कार्तिक २२ https://ekantipur.com/koseli/2025/11/08/22-rhythms-of-the-madal-in-tharu-music-45-49.html?

पुजा करट सम डिउँटा नै ट भुट्वा ?

पुजा करट सम डिउँटा नै ट भुट्वा ?

१७९ दिन अगाडि

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२३ कात्तिक २०८२

                                                                                                                                                                               तस्विरः उदय आले सोम डेमनडौरा   ओंर्वा ना रो नि कि भुट्वा चुट्टरिम चिकिट् डि ।  मै यि छोटिहम सुन्लक बाट हो । डिहुरार कोन्टि जैना डर लाग । घर सुनसान रहल ब्याला कोन्टिम पैंठ्ना मुस्किल ह्वाए । स्कुलसे पहर्क आइल पाछ कोन्टिम किटाब ढर जाइ पर्ना । पिर्यारिम बरा ढिरसे पउलि सर्टि जाउँ । सर्याक सुरुक आवाज फे नि निक्रना मेरिक नेंगु टा कि डिहुरारम रलक भुट पटा ना पाइँठ । घुम्क आइबेर पिठि ख्वालहस कर । अन्ढ्ओइल बेर ठेगान डगुर्ना हो बहरि नि पुगठ सम ।  हमन हमार डिउँटन्क सम्मान नाइ कि हुँकहन्से डर पैडा कर्जाइठ । हमार रक्षा, सुरक्षा कर्ठ, मजा कर्ठ नाइ कि डर लगैठ । हमार बोल्ना टरिका फे उह मेरिक बा । डिउँटन् भुट कठि । डिहुरारम भुट बाट । भुटनक पुजा कर्लो कि नाइ ? टुन्हँक घरक भुट्वा कसिन बा ? ठन्ह्वमका भुट । भुटक मट्लब डुरवइना । भुटक मट्लब हमार बिगार कर्ना । आब प्रस्न उठठ्, का जे थारु भुट बगाइ भिरल बाट ? का जे डिहुरार ओ ठन्ह्वम जाइ छोर्क मन्दिरम जाइ भिरल बाट ? का जे ठारु डिहुरारम घोरि, मैया ओ गुर्वावाह ठान डेहक छोर्क कैयौ ठो मुन्टा हाँठ बनाइल् डेबि डिउँटन्हँक पोस्टा टाँग भिरल बाट ? याकर ट एक्कठो उट्टर बा, मन्दिर ओ पोस्टम रलक डिउँटा हुइट । हमार डिहुरार ओ ठन्ह्वम रलक ट भुट हुइट ।  जहोंर ठन्ह्वा बा, उ डगर लर्काहा जन्नी मनै नेंग्बे नि कर्ठ । भुट लाग्जैठ कना बिस्वास बा । गाउँम जब कौनो गार्हो सार्हो परठ ट गाउँक सझ्या ठन्ह्वम रलक डिउँटन् पुकर्ठि । गाउँभरिक मनैन्हँक साझा संस्ठा बरघर समिटि कहि या घरढुरिन् कहि समय समयम ठन्ह्वम पुजा कर्ठि । भ्वाज काजम उह डिउँटन साक्षि ढर्क, घुम्क बराट डुल्हि लिह जा जाइठ । फेर कसिक लग्ठ ट ? जेहिंसे हम्र सुख ओ खुसिक आस कर्ल बाटि, उ कसिक डुख डेठ ट ? अठ्ठिहँ हम्र गल्टि कर्टि बाटि ।  जब जब अन्ट कहुँ जाइ लग्बो ट डग्रिम मन्डिर डेख्टि कि हाँठ जोर्ठि । आपन लिल्हारिम हाँठ ट्याप ट्याप जोटाक ढ्वाग लग्ठि । टर आपन ठन्ह्वक डिउँटन ढ्वाग लग्ना ट का डुर डुर भग्ठि । आपन डिहुरारम रलक डिउँटावन ट कब्बु फे ढ्वाग नि लग्ठि । आभिन घर फुट्गैलो कलसे ट झन् डिउँटा बर्का छावक केल हो गैल । अउर जन्हँक डिउँटा आपन हो गैल ।  यि असिन हुइनाम हमार आपन कमजोरि बा । हम्र हमार पाटम रलक डिउँटनक नाउँ ओ महिमा जन्ल नि हुइटि । हमन पुर्खावन् जनैबे नि कर्ल ओ हम्र फे जन्ना कोसिस नि कर्लि । यि डेमनरौरा हुइट, यि जोगेठ्वा हुइट, यि जगनठ्या हुइट । खेख्रि मैया, गुवार्वा, सौंरा, बहर्नि, ब्याँटिक लठ्ठि, टरवाल लगायटक डिउँटन्क महिमा जन्ल नि हुइटि । हिन्दु ढर्म जसिन महादेव सम्हारकर्टा, लक्ष्मी धनक डेबी, सरस्वती बिद्यक डेबी, दुर्गा रक्षा करुइया जस्ट हमार गुर्वावा सृष्टिकर्ता, बहर्नि धनक डेबी, मैया रक्षा करुइया कैक हिंकहन् चिन्ह ओ चिन्हाइ नि स्याकठुइ । पाटम का जे पिठले हाँठक छाप मार जाइठ ? गुर्वावा कलोर्या गैयक छालाले का जे बना जाइठ ? याकर उट्टर हमार ठे नि हो । कागट साडा रहठ ट हम्र फाँक डेठि, जरा डेठि या उठैना वास्टा नि कर्ठि । टर उह कागजम अट्रा रुप्या कैक छापल रहठ ट गुहम गिरल पैसा उठाक फे ढो ढाक गोझ्यम ढर्ठि । याकर ट एक्क कारन कलक महत्व बुझ्ना ट हो काहुँ । उह मार जबसम हम्र हमार डिउँटन्क महत्व बुझ नि सेक्बी, टबसम हम्र हमार ढर्म, संस्कृर्टि बचाइ नि सेक्बी ।  हमार ठे गुर्वावक जल्मौटि बा । यि संसारक सिर्जना ओ प्रानिन्क जरमक बारेम उल्लेख करल बा । गुर्वावाक बारेम बोल्गैल यि थारुन्हँक महाकाव्य हो । थारु के हुइट ? थारुन्हँक ढर्म का हो, यिह महाकाव्य ब्वालठ । गुर्वावक जल्मौटिक पैल्हा स्लोकम यि पृठबिक उट्पट्कि बारेम कहल बा, हाँ हाँ रे पहिल ट सिरिजल ढुरिया ढुकुन अब डैया कल जुग घेरल मिरटि भुवन अर्ठाट्, यि पिर्ठबिक  उट्पट्टि हुइनासे पहिल ढुर्या ढुकुन डेख परल । विज्ञान फे यिह कहठ । ओसिहँक अंगार, पानी बर्सना, जलचर, थलचर प्रानिन्क जरम हुइना बाट बट्वा गैल बा । असिन पवित्र महाकाव्यहँ हमार पुर्खावन् मुहम ओ आपन डिमागम केल लेल रल । अइना पुस्टाहँ मजासे सिखाइ नि सेक्ल । पोस्टक रुप डिह नि सेक्ल । आपन सँग गर्यम लै गैल । ज्याकर कारन फे हम्र हमार ढर्मक बारेम जान नि स्याकठुइ ।  याकर प्रतिफल हम्र बरा निख मजा भोग्टि बाटि । जहाँ गरिबी ओ अन्धबिश्वास रहठ, उहाँ ढर्म ओ संस्कृटि जब फे संकटम परल रहठ । गरिबिक कारनक मौका छोप्क बिस्टारबादिन मुन्टा उठैना मौका पैठ । ज्याकर फल हम्र प्रटेक्छ भोग्टि बाटि । हमार थारुहुँक्र आपन डिउँटा फाँक भिर्डेल । अउरक डिउँटा अप्नाइ लग्ल ।  ढर्म ओ संस्कृटि पहिचान हो । यि बा कलसे टुँ बाटो, नि हो कलसे नि हुइटो । टुँ के हुइटो कना आढार का हो ट ? उहमार फे हम्र हमार ढर्म ओ संस्कृटि बचाइ पर्ना बा । विश्वम ढर्म ओ संस्कृटिक साम्राज्यबाद ओ बिस्तारबाद फैलल बा । ज्याकर चपेटाम थारु भुलभुला गैल बाटि ।  ढर्म संस्कृटि संकटम का जे ? मनै स्वभाविक रुपम परिवर्टन मन परैठ । ज्या लिरौसि लागठ, उह कर्ठ । कहुँ हमार संस्कार ओ संस्कृटिम अर्बर अभ्यास ट नि हो ? यि बिचार कर पर्ना बा । हमार ठन्ह्वक डिउँटा कठ्वले बनल बाट । घरक डिउँटा कठ्वा ओ माटिले बनल बाट । याकर टिकाउ बा कि नि हो ? याकर आकर्सन बा कि नि हो ? यि फे बिचार कर पर्ना बा । जबकि अउर जन्हँक डिउँटा कागटम, लुग्गम, स्वानम, चाँदीम, पिट्टरम आ सेक्लिन् । हमार डिउँटा रलक ठाउँम हम्र बरा कम सरसफाइ कर्ठि । ठन्ह्वम डर लग्टिक झप्स्यार हो राखठ । डिहुरार ओ मर्वम मक्रक झ्वाल लाग जाइठ । हम्र हमार डिउँटावन् असिक बेवास्टा कर्ठि । अउर जाटक मनै रोज्ज पुजा पाठ कर्ठ । बिसेस पुजा बिसेस डिनम कर्ठ । टर टिउह्वारक ब्याला आपन मेरिक चलन अन्सार पुजा कर्ठ । मने हम्र थारु टर टिउह्वार ओ बिसेस अवस्ठम केल पुजा कर्ठि । ज्याकर कारन आस्ठा ओ बिस्वास कमजोर हुइटि जाइटा कि कना लागठ । गुर्वा कलक झारफुँक करुइया केल हुइट कना हमारम गलत ढारना बा । गुर्वा गुरु हुइट । ज्ञान हुइलक मनै हुइट । पुजा पाठम गुरै कर्ना बिद्वान ओ गुनवान मनै हुइट । टर हम्र गुर्वा कलक भुट भगैना, झारफुँक कर्ना मनैयक रुपम सिमिट कैक महत्व घटा डेल बाटि । सरकारी संयन्त्र जबरजस्ट हिन्दुकरन कर्टि बा । हिन्दु ढर्मसे सम्बन्ढिट मठ, मन्दिर, पुजाआजा, धार्मिक कार्यक्रमक लाग लाखौं करोडौं छुट्या डिहठ । थारुन्हँक लाग फुटल कौरि फे नि रहठ । हम्र ना ट माँग जन्ल हुइटि ना ट हमार नेटन हमार डिउँटनक लाग कुछ कर परठ कना मजा चेटना हुइटिन । केक्रो पुजापाठ हुइबेर लाखौं दान कैडेठ टर आपन ढरम, संस्कार ओ संस्कृटिसे जोर्गिलक ढार्मिक कार्यक्रमक लाग ना ट चासो डेखैठ, ना ट सहयोग कर्ठ ।  हम्र छोटिहँ से पर्वट्यन्क दशैं, तिहार, रामनवमी, तिज, ऋषि पञ्चमी, स्वस्थानी, नाग पञ्चमी, जनै पूर्णिमक बारेम कक्षक किटाबिम घोट घोट पहर्टि अइलि । मस्टर्वन्क पिटाइ से बचक लाग पानी पियहस पिलि यि टिउह्वार । हिकन्हँक यिह टिउह्वारक छुट्टिम हम्र फे मग्नमस्ट होक मनैलि बल कै कैख । टर स्कुलम हम्र हमार माघ, डस्या, डेवारि, गुर्या, अस्टिम्की, अट्वारिक बारेम कब्बु पर्ह नि पैलि । असिक हुइल से ट हम्र अउरक डेबी डिउँटन्हँक बारेम भर निखोर निखोर जन्ना हुइलि । हमार डिउँटन भर भुट बनाक बिस्रा डेलि । यि हस्तक्षेपकारी राज्यक हमार उप्पर ठोपारल बाढ्यटा हो । जौन फाँडामे थारु बझ्टि गैलि ।                                                                                                                                                             बाउँ पाँजर लेखक सोम डेमनडौरा हुइट हुइट जसिहँक घर फुट्टि गैल थारुन् ओसिहँक बर्कान कि ट छोट्कान ओंर डिउँटा जैना ओ उहैं पलि रना । टबसे हमार फे डिउँटा बाट कना सम्झ नि सेक्ठ । आब उहिंका डिउँटा बोक्ना झ्याउ से छुट्कारा पाइहस हुइठिन् । ज्याकर घर डिउँटा बाट, हुँक्र फे ढिर ढिर पुजा घटैटि घटैटि डिउँटन फे कुल्वम लब्डाक घटा डेठ । आब भबिस्यक सन्टानहँ आपन डिउँटावन् कसिक चिन्हैना ट ? ओ उहिंका हमार पहिचान का हो कैक कसिक बुझैना ? यि सब्से बरवार प्रस्न खिझ्यैटि रहठ । कसिक बचाइ सेक्जाइ ढर्म ओ संस्कृटि ? जसिहँक हम्र गल्टि कर्टि बाटि ओसिहँक ठोर्चे केल बुद्धि लगैना हो कलसे हम्र हमार डिउँटा बचाइ सेक्डर्बि । टर याकर लाग अप्नक आस्था ओ बिश्वास भर नि मुव हुइल । मै के हुइटुँ, हम्र के हुइटि कना कुछ बुझाइ हुइना जरुरि बा ।  १. आपन लर्कन डिउँटा चिन्हाइः  जिहिंका हम्र हमार रक्षा करुइया कैक हमार डिहुरार, मर्वा ओ ठन्ह्वम बिराजमान करैल बाटि हुँकहन डेबी डिउँटा कैक चिन्हाइ । गुर्वावा, मैया, जगनठ्या, ढरमरज्वा, डेमनरौरा, जोगेठ्वा, डहरचन्डी, सौंरा, बहर्नी, ब्याँटिक लठ्ठी ओ टरवालक महत्व, महिमा ओ भुमिका बट्वाइ । २. डर्सन ढ्वाग कराइः  हम्र कहुँ बाहर डुर जाइ लग्ठि या कुहँसे अइलि कलसे हम्र हमार डिउँटावन् सम्झठि । याकर लाग जैनासे पहिल ओ कहुँसे आइल ब्याला डिहुरारम रलक डिउँटाव डर्सन ढ्वाग लग्ना बानिक विकास करि ओ कराइ । डग्रिम डेउठन्ह्वा पर्गिल कलसे सम्मान सहिट हमार डिउँटावन् ढ्वाग लागि । असिक करबेर क्वारम रलक, पन्ज्र रलक लर्का का जे असिक कर्ठ कैक मनम प्रस्न उठहिन् । हुँक्र एकडिन जरुर पुछहिं यि के हुइट डाइ ? हिंकहन् का जे ढ्वाग लग्ठ बाबा ? टब हम्र लरौसिसे हमार डिउँटावनक बारेम जनैना सक्छेम हुइबि । टब्बहँ से लर्का चिह्न्टि जैहिं हमार डिउँटावन् ।  ३. डेउठन्ह्वा सुढारः  गाउँक सझ्या डिउँटा बैठ्ना डेउठन्ह्वक हरेक डिन सरसफाइ कर परल । वाकर लाग गाउँक गुर्वा ओ केसौका ढरमसाला बनाक उहैं बैठ्ना मेरिक व्यबस्ठा मिलाइ परल । उहाँ ढरम्से सम्बन्ढिट पोस्टा, सिडी, सुन्ना सामानक व्यबस्ठा मिलाइ परल । हरेक डिन सन्झ्या, बिन्ह्या गुर्वा ओ केसौका डेउठन्वम पुजापाठ् कर्ना रिटि बैठाइ परल । ४. मन्टर लेना ओ बँट्ना रिटिः  ढ्यार जसिन गुर्वन मन्टर केल जन्ठ । यि मन्टरक अर्ठ का हो कैक पुछबेर अन्कना जैठ । थारुन्हँक धार्मिक काव्य महाकाव्य बा । गुर्वावक जर्मौटी, बर्किमार, फुलवार, सख्या गिटक अर्ठ, महट्व ओ कह खोज्लक बाट पुछबेर नि जन्टु कठ । जेम्न डिउँटावनक महट्व, भूमिका, ज्ञान, बिश्वास, आस्ठा बा उहिंका हम्र अर्ठ्याइ नि सेक्ली कलसे ट वाकर का महट्व । जब महट्व नि हो कलसे का जे घरम ढर्ना ? का जे पहर्ना ? का जे अउर जहन बुझैना ? एकठो गम्भिर प्रस्न । उह मार जे जन्ल बा, उहिंसे सिखि । अइना डिनम आपन घरक हरेक लर्कन यि ढर्मक काव्यक बारेम सिखाइ । ५. गुर्वा बनाइः गुर्वा बन्बो ट डुख हुइठ कना आब्बक गलट बुझाइ बा । गुर्वा टिन मेरिक रठ कना हम्र बुझाइ नि स्याकठुइ । पैल्हा गुर्वा हुइट गाउँक सझ्या डिउँटा सम्हरुइया । ज्याकर खास भुमिका गाउँक डिउँटावन् पूज्ना, मनैना ओ सम्हर्ना हो । यि गुर्वा चहलसे झारफुँक, गुरैपाटि फे कर सेक्ठ । टर हिंकन्हँक खास भुमिका गाउँक ठन्ह्वमका बर्का गुर्वाक जिम्मेवारिम बाँढक चाहि । हिंकन्हँक पारिस्रमिक फे हुइना चाहि । डोसर गुर्वा कलक घरक डिउँटावन् पुजा कर्ना ओ सम्हर्ना गुर्वा । जे आपन डेबी डिउँटनक बारेम जानठ ओ मन्टरक ज्ञान रठिन् । टिस्रा गुर्वा कलक मन्टर जन्ना ओ झारफुँक करुइया हुइट । असिक गुर्वन्क भावनाट्मक बर्गिकरन कर सेक्लसे अइना पुस्टाहँ गुरै ज्ञान, गुर्वा ओ गुर्वावा बन्ना प्रेरना मिल्टिन् । गुर्वा बन्ना कलक बुद्धट्व पैना हो । गुर्वा कलक ज्ञानी मनै बन्ना हो कना सिखाइ बनैना जरुरि बा । ६. घर घरम डिउँटाः  अउरक डिउँटा सजैना भर ठाउँ रना, हमार डिउँटा ढर्ना ठाउँ नि पुग्ना यि अज्ञानता हो । घरक आघ मन्दिर बनाइट । घरक भिटा भर पोस्टरम बनाइल् डेबी डिउँटा टाँगट । टर डिहुरारक एक कोन्वम अटा जैना आपन डिउँटन उस्टा डिहटि हम्र । यडि ढ्यार डिउँटा बाट कलसे समय अनुसार परिमार्जन कर मिल्ना छुट बा हमार रिटिरिवाज ओ संस्कारम । असिक फे ट कर सेक्जाइठ् । डिउँटा झ्याउ नि हुइट हमार जिना, चल्ना ओ रना आढार हुइट । ज्ञानक स्रोट हुइट । आस्ठा ओ पविट्रटाक प्रटिक हुइट । घरम डिउँटा बाट कलसे बाहिर फे डिउँटा बाट । मनम डिउँटा नि हुइट कलसे कहुँ फे नि हुइट । ७. ढर्मक सन्डेसः  आपन डेबी डिउँटन चिन्हाइ, आपन ढर्मक सन्डेसक बारेम अउर जहन जनाइक लाग कागट, लुग्गा, कठ्वा, पठ्ठर, स्वान, चाँडि, पिट्टर ओ जहाँ जहाँ सेक्जाइठ, उहाँ उहाँ छपाइ कर्ना जरुरि बा । लगैना लुग्गम का जे हमार डिउँटनक प्रतिक नि रना ? हमार गुर्वावक, सम्ह्रौटिक डुइ लाइन काजे छपाइ नि सेक्ना ? यडि असिक कर सेक्लि कलसे अउर समुडाय ओ ढर्मक मनैन हमार ढर्म, संस्कार, संस्कृटिक बारेम चासो बर्हहिन् कलसे हमार समुडाय भिट्टरक मनै आपन ढर्मक पर्टि मैया ओ सम्मान बर्हहिन् । ८. ढार्मिक प्रवचन उट्सबः पहिल पहिल घर घरम सत्यनारायणक खिस्सा बाचन ह्वाए । जिहिंका कम्र काठा कर्ना कहि । आब्ब गाउँ गाउँक, स्कुल स्कुलम महायज्ञ हुइठ । भागवत गीता महाज्ञान पाठ हुइट । ढार्मिक प्रबचन हुइठ । जेम्न मनै लाखौं लाख दान कैडेठ । जिहिंम प्रवचन कैगिलक बाट मनम ढर्ठ । हमार ठे फे ट गुर्वावक जर्मौटी बा । बर्किमार, फुलमार, ढुमरु, अस्टिम्कीक गिट बा । का हम्र याकर प्रवचन कर्ना, यिहिंका अठर््यैना ओ यम्न रलक ज्ञान बाँट नि सेक्ना ? जरुर सेक्जाइ । टर नि बुझठ सम कसिक कर्ना ट ? जिम्मेवारी ट हमार हो जे हमार पहिचान बचैना । गाउँ गाउँम डस्यक ब्यालम भ्वाँकर लगाक बर्किमार प्रवचन करि । अस्टिम्किक ब्यालम अस्टिम्कि काव्य, अट्वारिक ब्यालम भ्याँवक भजन, हार्या गुरैक ब्यालम गुवार्वक जर्मौटि या जौन ब्यालम फे प्रवचन उट्सब मनाइ सेक्जाइ । यडि अट्रा नि कर पैलि कलसे अइना बिस बरस्म थारु के हुइट कना प्रस्नक चिरफार हमार अइना पुस्टन करहिं नि सेक्हिं । ९. ढार्मिक पोस्टा डस्टाबेजिकरनः संस्कृटि का हो कैक पोस्टा निक्रटा । साहिट्य का हो, गजल, कविटा, बट्कोहिक बारेम पोस्टा छपटा । टर साहिट्यक मुल स्रोट रलक काव्य, महाकाव्य छपाइ नि स्याकठुइटि । गुर्वावक जर्मौटी, बर्किमार, फुलवार जसिन काव्यहँ आब्बक लर्काओं बुझ सेक्ना मेरिक लिरौसि, सरलिकृट बनाइ नि स्याकठुइ । यडि अट्रा कर सेक्लि कलसे हमार काव्य ओ ढर्मक ज्ञान अइना पुस्टा सहजसे अपनाइ सेकि । १०. झोंर्या अभियानः  ढार्मिक, साँस्कृटिक अभियान, उट्सब चलाइक लाग पैसा बरवार भुमिका ख्यालठ् । पैसा बा कलसे कुछ ना कुछ कर्ना उपाइ चलठ् । टर फे बिचार, ज्ञान, सचेतना, बौद्धिकता, सिर्जनशिलता, लगाब ओ झुकाब हुइना फे जरुरि बा । यडि मनै सोंच पैडा कर नि स्याकठुइट कलसे पैसा फे काम नि कर स्याकठ् । पैसा साढन हो साढ्य नि हो । साढनहँ चलाइ जान परठ् । टर यि ब्यालासम पुगबेर थारु समुडायम फे बहुट जे लिख पहर गैल बाट । उहमार बरवार बरवार काम करक लाग पैसा संकलन कर्ना, बजेट निकासा कर्ना, बजेट बिनियोजन कर्ना, योजना बनैना ओ कोस संकलन कर्ना जरुरि बा । गाउँ गाउँम गुर्वा, केसौका ओ चौकिडर्वक लाग टिहाइ उठैठ । यिह ब्याला ढार्मिक कोस बर्हाइक लाग सहजसे ठप टिहाइ उठाइ सेक्जाइ । किउ किउ पैसा टिहाइक रुपम डिह सेकहिं । झोंर्या अभियानक रुपमा हमार ढार्मिक उट्ठानक लाग कोस संकलन कर्ना सस्टा उपाय बा । ११. गुर्वा, केसौकनक सम्मानः हमार रिटिरिवाज ओ संस्कार, संस्कृटि सम्मान कर्ना मेरिक बा । डस्यम आपन पुर्खन पिट्टर डेक सम्मान जनैठि । घरम अइलक पहुनन् मान मर्जाट, स्वागट, सम्मान कर्ठि । टर जे गाउँक विकास, पहिचानक अख्वारि करठ या समुडाय चिन्हैना काम करठ ओसिन मनैन डेख्ना, सुन्ना ओ महसुस कर्ना मेरिक सम्मान डिह नि स्याकठुइ । कबुकाल बरवार कार्यक्रमम बलाक सम्मान कर्ना, वाकर भुमिका ओ कर्टव्यक बारेम प्रसंसा कैडेना हो कलसे मनैन् आभिन मजा काम कर्ना मन लग्ठिन । हमार गुर्वा, केसौका, चौकिडर्वा ओ सोर्हिन्यन् फे सम्मान कर सेक्लसे ढार्मिक ज्ञानक लाग उट्प्रेरना बर्हहिन । असिन कर्लसे अइना युवा पुस्टा फे गुर्वा बन्ना, ज्ञान लेना बानिक विकास ओ ढर्म, संस्कृटिक बारेम जन्ना जाँगर चलहिन । १२.स्थानीय तहहँ दबाबः अउर जन्हँक ढर्मक लाग मठ, मन्दिर बनैना जग्गा, बजेट छुट्याइ बन्ना हमार थारुनक डेउठन्ह्वा बनैना बजेट नि छुट्यैना ? यि ट बरवार बिभेद हो । यम्न डुइ मेरिक बा । चाल कर्लसे ठोर्चे डारहस कर्ना फे हेराडेना । कहुँ कहुँ चाल नि कर्ना । हम्र हमार ढर्म, संस्कृटि, संस्कारक संरक्छेन ओ विकासक लाग स्थानीय तहम लगाटार वकालट कर पर्ना बा । इहि आन्दोलनक मुद्दा बनाक लैजाइ पर्ना बा । ओसहक यि सवालम संघिय सरकार ओ प्रदेश सरकारह फे डबाब डेहहि पर्ना बा ।   १३. गुर्वावा डिवसः जबसम हल्ला नि कर्बो ट किउ निसुनठ् । किउ नि सुनठ् कलसे किउ नि जानठ् । यडि जन्ल नि हुइट जनैना ओ लिख्ना काम नि कर्ठ । उहमार, आब संसारक मानव समुडायहँ थारुन्हँक डिउँटा यि हुइटिन कैक जनाइ पर्ना बा । याकर लाग हार्या गुरै (बर्हनख्ना) क ब्यालम गुर्वावा डिवस ढुमढामक साठ मनाइ पर्ना बा । गाउँ गाउँम गुर्वावक प्रटिमुर्टि सहिट र्याली निकारि, गुर्वावक भजन गवाइ । टब कसिक नि चिन्हही हमार डिउँटावन ? गोंरि मराइ ढर्म, संस्कृटि, संस्कार, भेसभुसा, चालचलन हमार पहिचानक आढार हो । हमार संस्कृटि बा ट हम्र बाटि, यि नि हो कलसे हम्र नि हुइटि । यि बाट घाम जसिन छर्लंग बा । आपन डिउँटावन भुट जिन बनाइ । भासा बड्लि, बिचार बड्लि । आपन डिउँटावन डिउँटा कहि । डिउँटावन् चिन्हाइक लाग, ओइनक महिमा बर्हाइक लाग कमजोरि सँच्याइ ओ अपन गाउँसे सुढारक परगा बर्हाइ । जय गुर्बाबा ! राजापुर नगरपालिका, जोतपुर, बर्दिया, हालः नेपालगन्ज साभारः गोरखापत्र दैनिक, २०८२, कार्तिक १८, थारु भासा पृस्ठ demandaura.som@gmail.com

चुनाव कसका लागि ? चुनाव के का लागि ??

चुनाव कसका लागि ? चुनाव के का लागि ??

१८३ दिन अगाडि

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२० कात्तिक २०८२

आवधिक निर्वाचन (चुनाव) लोकतन्त्रमा अपरिहार्य मानिन्छ । वालिग मताधिकारको प्रयोगमार्फत् हुँदै आएको आवधिक निर्वाचन यस पटक भदौ २३ र २४ गते (सेप्टेम्बर ८ र ९) भएको जेन–जी पुस्ताका युवा विद्यार्थीहरूको चरम भ्रष्टाचार विरुद्धको आन्दोलनले मुलुक प्री–इलेक्सनमा धकेलिन बाध्य भयो । त्यसले चुनाव कसका लागि, चुनाव के का लागि ? भन्ने सवाल खडा गर्न पुग्यो । अर्थात् चुनावलाई जेन–जी पुस्ताका आन्दोलनकारीले कसरी बुझ्ने हो ? के परिवर्तन संस्थागत गर्न यो चुनाव भरोसा गर्न लायक बन्ला ? जे भए पनि आगामी फागुन २१ गते चुनावको मिति घोषणा भएको छ । प्रतिनिधि सभा भंग गर्दै जेन–जी पुस्ताका युवा विद्यार्थीहरूको आन्दोलन सम्बोधन गर्न सम्माननीय सुशीला कार्कीको नेतृत्वमा नयाँ निर्वाचन गर्ने म्याण्डेडसहित चुनावी सरकार बन्यो । भदौ २८ गते गठन भएको उक्त सरकार हाल पर्यन्त पूर्णता प्राप्त गर्न असमर्थ देखिनु नै यो सरकार प्रतिको नजरिया बुझ्न सकिन्छ । तथापि संक्रमणकालीन यो सरकारलाई शंकाको सुविधा छ, कारण संक्रमणकाल देश, समाज, एवं अर्थतन्त्र जताततै छ ।  त्यसो त लम्बिदो संक्रमणकाल अन्ततः जेन–जी पुस्ताका आन्दोलनबाट पलाएको आशालाई निराशामा बदल्ने अवस्था ल्याउँछ भने लोकतन्त्र सही अर्थमा संकटग्रस्त बन्दै जानेछ । यो जोखिमपूर्ण अवस्थाको आँकलन समयमा नै हुनुपर्ने हो । साथै, चुनावमा दलीय प्रतिस्पर्धा अनिवार्य ठहर हुँदा राजनीतिक सम्वाद तत्काल सरकारको प्राथमिकतामा हुनैपर्छ । किनकि स्वतन्त्र, भयरहित तथा निष्पक्ष निर्वाचनको लागि निर्वाचन आयोग र सरकार एक अर्काको परिपुरक बन्न जरुरी छ । संसदविहिनताको अवस्थामा सरकारले अध्यादेशमार्फत् कतिपय ऐन ल्याउने होला । यसरी अध्यादेशको भरमा लामो समय सरकारी रबैया जारी राखे मुलुक निरंकुशताको भुमरीमा जाने र द्वन्द्व बढ्ने प्रष्ट मार्गचित्र देखिन्छ तर चरम भ्रष्टाचार एवं राजनीतिक वेथिति विरुद्धको आन्दोलन यी परिवेश निर्माणमा सहयोगी बन्ने अवस्था छैन । बरु आफ्नो भविष्य सुनिश्चित गर्न जेन–जी पुस्ताका युवा विद्यार्थीहरू अझ संगठित भएर व्यवस्थित संघर्षका लागि अगाडि बढ्ने जुक्ति खोज्लान् । विभिन्न राजनीतिक दलभित्रै पुस्तान्तरणको एजेण्डा मजबुत बन्दै गर्दा उनीहरू त्यसको समर्थनमा बल प्रदान गर्लान् त ? उनीहरू जे सोच्दै छन्, देशको हितमा छ । त्यसले देश बनाउने जिम्मा अब युवाहरूको काँधमा छ भनी सन्देश प्रवाह गर्छ । जे होस्, अबको निर्वाचन पचास प्रतिशत युवा प्रतिस्पर्धीबिच सम्पन्न हुने देखिन्छ । किनकि पुस्तान्तरणको नाराले यहाँ दलका मठाधिशहरुको जोड पक्कै अधिक संख्याका उम्मेदवार विजयी बनाउन युवा उम्मेदवार छनौट प्राथमिकतामा पर्ने सम्भावना छ । त्यतिवेला उनीहरूको चुनौती भनेकै जेन–जी पुस्ताले गरेका शान्तिपूर्ण आन्दोलन र उक्त आन्दोलनसँग सम्बन्धित एजेण्डाको न्यायिक समाधान हुने विषय हो ।  के का लागि चुनाव ? नेपालको संविधान जारी भएको पनि एक दशक पुग्यो । रक्तरञ्जित यो संविधानलाई मधेसी, थारू लगायतका अधिकांश असन्तुष्ट जनता ठाडै अस्वीकार गरे । टीकापुर, कैलालीमा भएको थारू समुदायको जनविद्रोह राजनीतिक घटना भन्दा पनि अपराधीकरणको घानमा पारियो । लिम्बुवान आन्दोलन भुसको आगोझैं थिया,े जुन ‘नो कोशी’ आन्दोलन ताका प्रकट रुपमा देखा पर्यो ।  यता नेपो–किड्स जो जेन–जी पुस्ताका युवा विद्यार्थीहरूको उमेरकै हाराहारी थिए, उनीहरू राज्यशक्तिको दुरुपयोग गर्दै रवाफिलो जिन्दगी बाँच्दै गरेको देखिन्थे । यसरी भ्रष्टाचार र वेथिति झाँगिएको कारण युवाहरूको निजी भविष्य यो देशमा छैन भन्ने भाष्य बन्यो । निराशा दिनानुदिन बढ्दो थियो र यी सब कारणले राष्ट्रिय मुक्ति क्रान्तिको अपरिहार्यता देखिन थाल्यो ।  प्रतिक्रान्तिमा विश्वास गर्ने कथित राजावादीहरू अराजक बन्दै गरेको अवस्थामा समेत देशको शासक सम्भ्रान्त हल्का फुल्का ढंगले थामथुम पार्ने काम हुँदा चरम भ्रष्टाचार एवं वेथिति विरुद्धको आन्दोलनमा युवा अग्रसर देखिए । अन्ततः ३० घण्टाभित्रै करिब दुई तिहाईको खड्ग प्रसाद ओली नेतृत्वको सरकार ढल्यो । नेपालमा दशकैपिच्छे अर्को नयाँ क्रान्तिको युग आउने गरेको तथ्य सत्य सावित भयो । साथै, आफ्नो कमजोरी लुकाउने वहानामा विदेशी शक्तिको चलखेलमा पर्दा जहिले पनि दुर्दशा भोग्न हामी अभिशप्त छौं । हाल घोषणा गरिएको चुनाव विषम परिस्थितिको उपज हो । तसर्थ, यसको अलग्गै महत्व छ । विशेष गरी जेन–जी पुस्ताका युवा विद्यार्थीहरू जसको निर्णायक मत यो निर्वाचनमा रहनेछ, ती आफ्नो सुनिश्चित भविष्यको चिन्तामा छन् । र, उनीहरू त्यसको रोड म्याप बनाउँदा भ्रष्टाचार न्यूनीकरणलाई प्राथमिकतामा राखेका छन् । यसअघि पटक पटक मन्त्री एवं अन्य विभिन्न पदमा आसन ग्रहण गर्दै पुस्ता दर पुस्तालाई पुग्ने गरी अकुत सम्पतिको सञ्चय गरेको देखिएपछि ती सब उपर सम्पति शुद्धिकरण ऐनअनुरुप अनुसन्धान हुनुपर्ने एजेण्डा अगाडि सार्न थालेका छन् । त्यसले अबको निर्वाचनमा स्वच्छ छविका उम्मेदवारको खोजी हुने स्पष्ट संकेत गर्छ । चुनावमा जीत हार भइरहने भाष्य यस पटक क्रम भंग हुने गरी परिणाम आउन जरुरी छ । यसको अर्थ युवा विद्यार्थीहरू जो आन्दोलनमा अभिमत प्रकट गरे, त्यसको संस्थागत हुनुपर्छ । दलाल पूँजिपतिहरूको चंगुलबाट देशलाई बाहिर निकाल्ने र राष्ट्रिय पूँजिपति वर्गको संरक्षण अपरिहार्य भएको कारण यहाँ कमिशन र भ्रष्टाचारको जरामा उपचार गर्न हिम्मत देखाउने नेतृत्व देशले खोज्यो । यो जिम्मेवारी दलभित्रका युवाहरूले वहन गर्नु पर्ने भएको छ ।  संविधानको मर्म र भावनाबमोजिम समानुपातिक समावेशीतालाई कार्यान्वयन गर्दै संघीयताका पक्षमा स्वशासन मजवुत बनाउन गर्नुपर्ने काम थुप्रै छन् । विविधतालाई एकताको सुत्रमा बाँध्ने जुक्ति हामी सार्वभौम नेपाली जनताको वस्तुगत परिभाषा खोजी गर्नु आजको अनिवार्य शर्त ठहर भयो । तसर्थ, आमूल परिवर्तनका लागि यो चुनाव हुने परिस्थिति निर्माण गर्नु छ ।  कसका लागि चुनाव ? फागुन २१ गते घोषणा गरिएको चुनाव सम्पन्न हुनु जरुरी छ । कथंकदाचित यो चुनाव समयमा हुन नसकेको अवस्थामा संक्रमणकाल लम्बिने छ । त्यस्तै लम्बिदो संक्रमणकालसंगै देशमा जेन–जी पुस्ताका युवा विद्यार्थीहरूको आन्दोलनको पराकम्पन्न पुनः देखिन सक्छ । यी घटना परिघटनाहरू कालन्तरमा लोकतान्त्रिक संस्थाहरूलाई प्रभावित हुने गरी अगाडि बढ्दै गएको खण्डमा जेन–जी पुस्ताका युवा विद्यार्थीहरूलगायत आमजनतामा संकट अनुभूति हुने पक्का छ । त्यस अर्थमा जेन–जी पुस्ता नै बढी सतर्क हुनु परेको छ । आफ्नो एजेण्डामा प्रतिबद्ध रहन जरुरी छ । राजनीति कुनै निश्चित पुस्ताका लागि देशमा हुँदैन र हुनु हुन्न पनि । यस पटक जेन–जी पुस्ता निर्णायक देखिएका कारण निर्वाचनमा उनीहरू ठोस भूमिका खेल्न सक्छन् । साथै, उनीहरू अधिकांश सामाजिक सञ्जालसंग जोडिएका कारण देश बाहिरसमेत प्रभाव बढाउन सक्छन् ।  भ्रष्टाचारको एक प्रमुख कारण चुनाव अत्यधिक खर्चिलो हुदै गइरहेको छ । स्वच्छ र ईमान्दार छविका कार्यकर्ताहरू पार्टीले जितोस् भन्ने चाहना राख्दा राख्दै आज विचौलियाहरूले पार्टीका मुख्य नेतृत्व वर्गको चुनावी खर्च उठाइ दिएवापत उनीहरूकै नियन्त्रणमा पार्टी चल्न थालेको देखिन्छ । तसर्थ, पार्टीले उम्मेदवार बनाएका जुन कुनै विचौलियालाई लक्षित गरी सामाजिक सञ्जालमार्फत् पर्दाफास गर्न लाग्ने वेला पनि हो यो निर्वाचन । साथै, विचौलियाको आडमा चुनाव खर्च उठाउने ती पार्टी नेतृत्वलाई पनि जेन–जीले भूमिका खेल्नुपर्छ । निर्वाचन आयोगले हाल विदेशमा श्रमस्वीकृति लिएर गएका नेपाली मतदाताहरूलाई मतदानको अधिकार दिने विषयमा छलफल गर्न लाग्दा पक्कै यसलाई व्यवस्थित गर्न सकिने सम्भावना बढ्यो । र, मताधिकार प्राप्त ती वैदेशिक रोजगारमा देश वाहिर रहेका मतदाताहरू आफ्नो भविष्यप्रति सजग र सुशासन कायम गर्न चुनावमा पहिलो पटक देश वाहिरबाट सहभागिता जनाउने सम्भावना बढेको छ । त्यसको प्रभाव विभिन्न दलहरूमा पनि देखिनेछ । तर, मुख्य विषय यहाँका सीमान्तिकरण र वहिष्करण भोग्दै आएका नेपाली जनता आफ्नो जनमत यसपटक आफ्नै स्वार्थलाई केन्द्रमा राखी प्रयोग गर्ने क्षमता विकास गर्न सक्नुपर्छ । त्यो भनेको नेतृत्वदायी भूमिकामा अब उनीहरू खारिन सक्नुपर्छ र प्रत्यक्ष कार्यकारी शासन प्रणाली स्थापना गर्न संविधान पुनर्लेखनमा मतैक्यता जनाउन लाग्नुपर्छ । अन्त्यमा, औपचारिकतामा यो चुनावलाई सीमित पार्न हुन्न । विशिष्ट परिस्थितिमा यो चुनावको मिति तोक्ने काम भएकाले यसलाई सबैको साझा नेपाल बनाउने संकल्प बनाउन जरुरी छ । भ्रष्टाचार र चरम वेथितिको एउटा कारण चाकरीतन्त्र पनि हो । सरकार अस्थिर बन्दै गर्दा कर्मचारी प्रशासनभित्र चाकरीतन्त्र राणाकालदेखि नै मौलायो । यसको क्रमभंगता आवश्यक ठहर भइसक्यो । यसलाई प्रष्ट रुपमा भन्नुपर्दा कर्मचारी प्रशासन लाचारीको साधन बन्न कदापी सुहाउँदैन । मौजुदा कानुनको अभ्यास सही तवरले कार्यान्वयनमा गयो भने पनि चुस्त प्रशासनको आभाष दिन सकिन्छ । चुस्त प्रशासनिक गतिविधिमार्फत् सेवा प्रदान गर्न सकेमा जनसेवा र सुरक्षामा परिवर्तन देख्न सकिन्छ । अन्ततःलजनता लोकतान्त्रिक संस्कार अबलम्बन गर्न बाध्य हुनेछन् ।  कुनै पनि वहानावाजीले निर्वाचन प्रभावित गर्न दिनु हुँदैन । अहिले सर्वोच्च अदालतमा प्रतिनिधि सभा पुनस्र्थापना गर्न रिट परेको छ । त्यो विषयमा सर्वोच्चले विधि प्रक्रिया मिलाएर निर्णय देला । तर, जनस्तरबाट चुनावी दवाव सिर्जना गर्न जेन–जी पुस्ता यो सरकारलाई सहयोग गर्नुपर्ने भयो । पहिले आफ्नो नाम मतदाता नामावलीमा प्रविष्ट गर्न अभियान चलाउने हो र दोश्रो विभिन्न दलभित्रै युवा उम्मेदवारका लागि आन्तरिक दवाव सिर्जना गर्नका लागि एकजुट रहेको देखाउन एजेण्डा ठोस गर्न सक्नुपर्छ । यी सब आत्मगत तयारीका लागि सहयोगी ठहर्छ ।  साथै, वस्तुगत परिस्थिति आफ्नो पक्षमा पार्न सामुदायिक तहमा देखिने मासु र मदिराको लतमा मत विक्री गर्ने परम्परा तोड्न व्यापक र सशक्त सुरक्षा नीति अबलम्बन गर्न सक्नुपर्छ । अर्थात् मत बहकाउमा होइन, बरु विचारमा सहमत भई हाल्न उत्प्रेरित गर्ने अभियान सञ्चालन गर्न सक्नु पर्छ । त्यसका लागि सुरुवात आफैंबाट गर्ने कि ? यस पटकको चुनाव हाम्रो आफ्नै लागि ! अब जागौं सबै सीमान्तिकरण र वहिष्करणमा परेका हामी सार्वभौम नेपाली जनता र लागौं स्वशासनको जगमा अब सुशासन अभ्यास गर्न । मतवाला मात्र होइनौं, हामी अब हिम्मतवाला बनेर मोर्चामा डटौं । यसो गरे कसो होला ?